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शहर की सबसे पॉश सड़क के फूटपाथों पर कब्जे, पेडेस्ट्रियन्स के लिए बनाई थी सड़क या धन्नासेठों को दी राहत - Uturn Time
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स्मार्ट सिटी की आड में मल्हार रोड रेनोवेशन पर 100 करोड़ किए बर्बाद लुधियाना/यूटर्न/15 मार्च। लुधियाना शहर की सबसे पॉश सड़क मानी जाती मल्हार रोड को कांग्रेस सरकार के राजनेताओं द्वारा रेनोवेट कराया गया। जिस पर स्मार्ट सिटी की आड में करीब 100 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। लेकिन अब इस सड़क से होने वाले नुकसान सामने आने शुरु हो चुके हैं। कहने को तो पुरानी सरकारों के राजनेताओं ने इस सड़क को एक मिल पत्थर बताया था। लेकिन अब इस मिल पत्थर अर्थात स्मार्ट सड़क बनाने के असली कारण निकलकर सामने आ रहे हैं। सड़क पर शोरुम मालिकों द्वारा जमकर फूटपाथों पर ही अवैध पार्किंग कर दी जा रही है। वहीं सड़क पर सामान रखकर और रेहड़ियां लगाकर कब्जे कर डाले गए। हालात यह है कि 120 फीट की सड़क पर राहगीरों के निकलने के लिए मात्र 50-60 फीट जगह ही बची है। ऐसे में चर्चा छिड़ गई है कि क्या इस सड़क को पेडेस्ट्रियन्स के लिए बनाया गया था या धन्नासेठों को राहत दी गई थी कि वह अपने और ग्राहकों के वाहन सड़क पर लगा सकें। हैरानी की बात तो यह है कि नगर निगम के अधिकारी भी इसे देखकर अनदेखा कर रहे हैं। आप नेता और समाजसेवी रविंदर पाल सिंह घई की और से इस संबंधी सीएम ऑफिस और लोकल बॉडी विभाग को शिकायत की गई। शिकायत के बाद एक्शन हुआ और कुछ अवैध कब्जे उठाए। लेकिन अवैध पार्किंग अभी भी बरकरार है। बिल्डिंगें नहीं की सील, सड़क पर पार्किंग सुविधा दे डाली बता दें कि मल्हार रोड पर जितने भी शोरुम है, सभी इललीगल है। नक्शों में इन शोरुम की बेसमेंट में पार्किंग है, लेकिन वहां कमर्शियल एक्टिविटी करके वाहन सड़कों पर लगाए जाते हैं। वहीं चर्चा है कि पूर्व सरकारों के राजनेताओं द्वारा इन इमारतों को सील नहीं कराया गया, बल्कि वॉलकिंग स्ट्रीट के नाम पर सड़क बना डाली। कहने को तो यह पैदल चलने वालों के लिए सड़क बनी थी, लेकिन अब देखकर लगता है कि असलियत में यह सड़क शोरुम मालिकों और उनके ग्राहकों को पार्किंग की सुविधा सड़क पर देने के लिए बनाई गई थी। चर्चा है कि इस सड़क का मुख्य मकसद भ्रष्टाचार करना था। पैसा हड़पने के मकसद से सड़क को बली का बकरा बना दिया गया। पैदल चलने वालों का छीना हक राजनेताओं द्वारा जनता को उनके हक दिलाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन यहां पैदल चलने वालों के लिए बनाए फूटपाथ पर कब्जे करवाकर उनका हक छीन लिया गया। दरअसल, यह सड़क इस तरीके से बनाई गई है कि उसके फूटपाथ नॉर्मल फूटपाथ से कई गुना चौड़े बनाए गए। वह इस तरह बने हैं कि गाड़ियां फूटपाथों पर पूरी तरह कवर हो जाती है। जबकि उक्त फूटपाथ मुख्य सड़क से ऊंचे बनाए गए, ताकि राहगीर सिर्फ सड़क पर ही चल सकें। पुरानी सरकारों के राजनेताओं तो जनता का हक छीना ही है, मौजूदा आप सरकार के राजनेता भी इन अवैध कब्जों को कम नहीं करवा सके। निगम अफसरों को शोरुम मालिक करते हैं ऑब्लाइज मल्हार रोड से कारपोरेशन जोन-डी ऑफिस की दूरी चंद कदमों की है। लेकिन फिर भी निगम अफसर व तहबाजारी टीम इस पर एक्शन नहीं ले पा रही। हैरानी की बात तो यह है कि निगम अफसर और मेयर रोजाना इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। लेकिन पता नहीं उन्होंने ऐसा कौन सा चश्मा लगा रखा है कि उन्हें यह कब्जे दिखाई नहीं दे पाते। वहीं चर्चा है कि मल्हार रोड पर नामी कपड़ा, स्वीट्स और ज्लेवरी शोरुम है, निगम अफसरों व लीडरों को शोरुम मालिकों द्वारा ऑब्लाइज करते हुए लग्जरी चीजें गिफ्ट दी जाती है। इसी कारण उन पर एक्शन लेने से अधिकारी गुरेज करते हैं। सड़क ऐसे खराब की कि अब दोबारा से तोड़कर बनानी पड़ेगी वहीं मल्हार रोड को मिल पत्थर कहने वाले राजनेताओं द्वारा सड़क को इस तरीके से खराब किया है कि अब इसे दोबारा से तोड़कर बनाना ही एक रास्ता बचा है। वहीं जब भी मल्हार रोड पर अवैध कब्जों का मामला मीडिया की सुर्खियों में आता है, तभी निगम अफसर कार्रवाई करते हैं। लेकिन उनकी तरफ से सेल्फ तौर पर कार्रवाई नहीं कर पाते। ---