चंडीगढ़ 01 Jan । अब चंडीगढ़ को आधिकारिक तौर पर 100 प्रतिशत साक्षरता वाला शहर कहा जा सकता है। शिक्षा विभाग के प्रयासों और एनएसएस वॉलंटियर्स, शिक्षकों तथा अपार आईडी पोर्टल के सहयोग से शहर के हर घर तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। वर्ष 2025 में इस दिशा में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुईं, जिसने वर्ष 2026 के लिए शिक्षा के नए मानक तय किए हैं।
प्रौढ़ शिक्षा के उल्लास अभियान के तहत शहर के हर घर का सर्वे किया गया और अशिक्षित व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें पढ़ने-लिखने का प्रशिक्षण दिया गया। एनएसएस वॉलंटियर्स और स्कूल शिक्षकों ने मिलकर बच्चों और प्रौढ़ों दोनों को शिक्षा दिलाई। इसके परिणामस्वरूप शहर में अब कोई भी अशिक्षित नहीं बचा।18 वर्ष तक के 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की गई, जिससे उनकी शैक्षणिक जानकारी एक सुरक्षित और पारदर्शी पोर्टल पर दर्ज हो गई। इससे न सिर्फ विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का सही ट्रैक रखा जा सकेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी योजना या सहायता के लिए आसानी से डाटा उपलब्ध होगा।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वर्ष 2025 में 10 साल बाद 900 से अधिक नियमित शिक्षकों की भर्ती की गई। इसके साथ ही 500 के करीब समग्र शिक्षा अभियान (SSA) शिक्षकों की लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2026 में होने की उम्मीद है। स्कूलों में पुराने टीन शेड हटाकर पक्के एक्सटेंशन ब्लॉक तैयार किए गए, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिला।
कमजोर विद्यार्थियों की सहायता के लिए सर्दियों की छुट्टियों में पहली बार ऑफलाइन रेमेडियल क्लासेस शुरू की गईं। इससे बच्चों की एकाग्रता और समझ में सुधार हुआ और उन्हें ट्यूशन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रही।
शिक्षा विभाग के निदेशक नीतिश सिंगला ने कहा इन सभी प्रयासों को वर्ष 2026 में भी जारी रखा जाएगा ताकि चंडीगढ़ में शिक्षा का स्तर और मजबूत हो और हर बच्चा तथा हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।इस उपलब्धि के साथ चंडीगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में एक उदाहरण पेश कर रहा है, जहां समग्र और सुनियोजित प्रयासों से हर घर और हर नागरिक तक शिक्षा सुनिश्चित की गई।