चंडीगढ़/यूटर्न/ 13मार्च। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि लगभग चार दशक के बाद लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध ऐसा प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक घटना है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे सदन के होते हैं और वे पक्ष एवं विपक्ष दोनों के अधिकारों के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए इस पद की गरिमा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का प्रयास है।
गृह मंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव पर लगभग 13 घंटों तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें पक्ष और विपक्ष के 42 से अधिक सांसदों ने अपने विचार रखे। इसके बावजूद विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख को कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की एक मजबूत पहचान है। ऐसे में जब इस सर्वोच्च विधायी संस्था के अध्यक्ष की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए जाते हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह पैदा होता है।
श्री शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है। उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को लगभग 158 घंटे और 18वीं लोकसभा में अब तक 71 घंटे बोलने का अवसर दिया गया है, जो सीटों के अनुपात के आधार पर सत्ताधारी दल से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को पर्याप्त अवसर देकर सदन की निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है।
गृह मंत्री ने कहा कि जब विपक्ष के नेता की बोलने की बारी आती है तो वे कई बार विदेश दौरों पर होते हैं और उसके बाद यह आरोप लगाया जाता है कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2025 के शीतकालीन सत्र के दौरान जर्मनी, 2025 के बजट सत्र में वियतनाम तथा 2023 के बजट सत्र में इंग्लैंड की यात्राओं के दौरान भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद की कार्यवाही में विदेश से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लेने की कोई व्यवस्था नहीं है और संसद निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार ही चलती है।
अमित शाह ने कहा कि संसद कोई जनसभाराओं को अक्षुण्ण बनाए रखे। या मेला नहीं है, बल्कि यहां बोलने के लिए स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। लोकसभा के नियम 374, 375 और 380 के तहत अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने, अनुशासनहीनता की स्थिति में कार्रवाई करने तथा असंसदीय शब्दों और टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य सदन की गरिमा, अनुशासन और प्रभावी कार्यवाही को बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि संसदीय इतिहास में इससे पहले भी तीन बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष में रहते हुए भी कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का रास्ता नहीं अपनाया। भाजपा ने हमेशा संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के पद की गरिमा को बनाए रखने का कार्य किया है।
गृह मंत्री ने कहा कि ओम बिरला ऐसे पहले लोकसभा अध्यक्ष हैं जिन्होंने नैतिक आधार पर, अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत होने के बाद सदन की अध्यक्षता नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस में तकनीकी त्रुटियों के बावजूद अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए उन्हें सुधार का अवसर दिया और प्रस्ताव को स्वीकार किया। यह उनकी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद केवल एक पीठासीन अधिकारी का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी परंपराओं और संसदीय गरिमा का प्रतीक है। जब इस पद की निष्ठा पर प्रश्न उठाया जाता है तो यह केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसकी संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाने के समान है।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान उनके अधिकांश भाषण स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित नहीं थे, बल्कि सरकार के विरुद्ध राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगाने पर केंद्रित थे। इसके साथ ही कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के चैंबर में जाकर सुरक्षा से जुड़ी स्थिति उत्पन्न करना भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंसदीय आचरण है।
अमित शाह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र मजबूत है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश को देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि संसद आपसी विश्वास, नियमों और मर्यादाओं के आधार पर चलती है और इन मूल्यों को बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आसन से आग्रह किया कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव को सदन बहुमत के साथ खारिज करे और लोकसभा अध्यक्ष के पद की गरिमा तथा संसदीय परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखे।