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इंडिया इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक आज चंडीगढ़ ज्यूडिशियल अकादमी में संपन्न हुआ, जिसके दौरान न्यायाधीशों, आर्बिट्रेशन प्रैक्टिशनरों और नीति विशेषज्ञों ने भारत में आर्बिट्रेशन और अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन (एडीआर) के भविष्य पर विचार-विमर्श किया। मुख्य भाषण देते हुए इंडिया काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन के डायरेक्टर जनरल अरुण चावला ने इस बात पर जोर दिया कि भरोसेमंद विवाद निपटारा प्रणालियां निवेशकों के विश्वास और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सीमा पार व्यापार का विस्तार हो रहा है, संस्थागत आर्बिट्रेशन को मजबूत करना और तकनीक को अपनाना भारत के विवाद निपटारा इकोसिस्टम में विश्वास पैदा करने के लिए आवश्यक है। भारत में एडीआर प्रथाओं के विकास पर आयोजित पैनल चर्चा के दौरान नरेश मार्कंडा, शाश्वत बाजपेयी, दीपक जिंदल, अनिमेष आनंद बोरदोलोई, नीरज कोचर, हरीशंकर के सथीपालन, कर्नल नरेंद्र सिंह और जोनाथन रोड्रिग्स ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने व्यावसायिक विवादों को सुलझाने और विवादों के प्रभावी निपटारे तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए मेडिएशन, आर्बिट्रेशन और संस्थागत तंत्र के बढ़ते महत्व पर चर्चा की। एक अन्य पैनल के दौरान संस्थागत आर्बिट्रेशन बनाम एडहॉक आर्बिट्रेशन पर चर्चा की गई, जिसमें संज़ीव शर्मा, देवना अरोड़ा, देवथास सतीनाथन, ए. जे. जवाद, सिद्धेश प्रधान, उल्ला ग्लेसर, नवीन कुमार सिंह, साहिल नारंग और श्रुति सभरवाल ने अपने विचार साझा किए। पैनलिस्टों ने बताया कि संस्थागत आर्बिट्रेशन अधिक प्रक्रियात्मक स्पष्टता, लागत से संबंधित पारदर्शिता और निगरानी प्रदान करती है, जो आर्बिट्रल अवॉर्ड्स के क्रियान्वयन को मजबूत बनाती है। “एनाटॉमी ऑफ इनफोर्सेबल अवॉर्ड्स” शीर्षक से आयोजित सत्र में एस. जे. वज़ीफदार और क्षितिज शर्मा ने क्रियान्वयन के चरण में चुनौतियों को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए आर्बिट्रल अवॉर्ड्स और प्रक्रियात्मक अनुशासन के महत्व पर चर्चा की। इससे पहले जे. आर. मिधा ने सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के माध्यम से आर्बिट्रेशन की दक्षता में सुधार करने के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने देरी को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्बिट्रेशन कानूनी समयसीमा के भीतर पूरा हो, संरचित दलीलों, प्रारंभ में स्वीकृत और विवादित तथ्यों की पहचान, पूछताछ तथा वीडियो-रिकॉर्ड की गई जांच के उपयोग पर जोर दिया। समापन भाषण देते हुए दिनेश महेश्वरी ने रेखांकित किया कि आर्बिट्रेशन विवाद समाधान की एक गतिशील संस्था के रूप में विकसित हुई है। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय आर्बिट्रेशन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए संस्थागत ढांचे, कानूनी विद्वता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। अपने समापन वक्तव्य में अश्वनी कुमार मिश्रा ने कहा कि सप्ताह भर चले इस आयोजन ने विभिन्न अधिकार क्षेत्रों से विविध विचारों को सामने लाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विवाद समाधान तंत्र का अंतिम उद्देश्य समाज में शांति और न्याय को बढ़ावा देना है। उन्होंने युवा वकीलों और छात्रों की भागीदारी की सराहना की, आयोजन टीम के प्रयासों की प्रशंसा की और आशा व्यक्त की कि चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर जैसी पहलें विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।