पंजाब/यूटर्न/ 12 मार्च।पंजाबी मूल के सिख व्यक्ति ने कनाडा में फर्जी एडवोकेट बनकर लोगों को वीजा लगवाने के नाम पर ठग लिया। केस दर्ज होने के बाद आरोपी अंडरग्राउंड हो गया है। अब कनाडा के ओंटारियो की किचनर पुलिस उसे ढूंढ रही है। पुलिस ने कहा कि आरोपी की पहचान 34 वर्षीय हरशरण आहलूवालिया के रूप में पर हुई है। वह पंजाबी मूल का है, लेकिन उसके पास कनाडियन पासपोर्ट है। हरशरण ने किचनर एरिया में 3 लोगों से वीजा लगवाने का वादा किया। इसके लिए उनसे 5-5 हजार कनाडियन डॉलर लिए और गायब हो गया। दफ्तर में न मिलने पर लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने बताए गए एड्रेस पर उसे कई बार ढूंढा। न मिलने के बाद उसे कनाडा के वॉन्टेड क्रिमिनल की लिस्ट में डाल दिया है। पुलिस ने सर्कुलर जारी करते हुए आरोपी का फोटो जारी किया है। पुलिस ने कहा कि जिसे भी यह व्यक्ति मिले वह कनाडा पुलिस को सूचित करे। इसके लिए मोबाइल नंबर भी जारी किया गया है।
कनाडा पुलिस ने आरोपी के बारे में अहम बातें बताई
किचनर पुलिस ने बताया कि 34 वर्षीय आरोपी हरशरण आहलूवालिया ने खुद को प्रोफेशनल इमिग्रेशन वकील बताकर लोगों को वर्क वीजा दिलाने का झांसा दिया। उसने मई 2024 से जुलाई 2025 के बीच पीड़ितों से लीगल फीस और प्रोसेसिंग चार्जेस के नाम पर 5-5 हजार डॉलर रकम वसूली, जबकि वह कोई रजिस्टर्ड वकील नहीं है। किचनर पुलिस ने बताया कि जांच में खुलासा हुआ कि पैसे लेने के बावजूद आरोपी ने सरकारी पोर्टल पर वीजा का कोई भी आवेदन नहीं किया था। वॉटरलू रीजनल पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी पहचान बताने के 3-3 मामले दर्ज कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस ने आरोपी का फोटो जारी कर दिया है ताकि ठगी का शिकार बाकी लोग भी इसे पहचान सकें। पुलिस ने कनाडा के लोगों से अपील की है कि अगर कोई और भी आहलूवालिया के झांसे में आया है, तो वह तुरंत पुलिस के नंबर पर संपर्क करे। पुलिस ने शिकायतर्ताओं की पहचान न बताते हुए कहा कि उनके पास मुख्य शिकायतकर्ता ने बताया कि आहलूवालिया ने खुद को प्रोफेशनल वकील बताया था। पीड़ित ने बताया कि उसने वर्क वीजा की प्रक्रिया के लिए मई 2024 से ही पैसे देने शुरू कर दिए थे।वह लगभग पांच हज़ार डॉलर दे चूका था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक साल से ज्यादा समय बीतने पर भी लीगल फीस और प्रोसेसिंग चार्जेस देने के बाद भी वीजा का कोई पता नहीं चला। इसके बाद उसे शक हुआ। अपने तौर पर जांच करने पर पता चला कि आरोपी ने सरकारी पोर्टल पर कोई भी आवेदन दर्ज ही नहीं किया था।