पंजाब / यूटर्न / 11 मार्च।जालंधर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और बुकिंग नियमों में बदलाव के कारण हाहाकार मचा हुआ है। जहां घरेलू उपभोक्ताओं को अब 15 दिन के बजाय महीने में केवल एक बार बुकिंग की अनुमति मिल रही है, वहीं कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से ढाबा संचालकों और छोटे व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा छोटे-छोटे ढाबा संचालक ब्लैक में गैस अत्यधिक दामों में खरीदने को मजबूर है।जालंधर के कीर्ति नगर स्थित एचपी गैस एजेंसी पर इन दिनों ग्राहकों का आना जाना लगा हुआ है। आम लोग ऑफिस के चक्कर लगाने को मजबूर है। लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है। ग्राहकों का कहना है कि वे कई दिनों से सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोबाइल पर ओटीपी (OTP) ही नहीं आ रहा।
30 दिन बाद होगा घरेलू सिलेंडर की बुकिंग
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पहले घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 15 दिनों के अंतराल पर हो जाती थी, लेकिन अब इस समय अवधि में बदलाव किया है। अब एक सिलेंडर मिलने के पूरे 30 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक किया जा सकेगा। इस नियम की जानकारी न होने के कारण उपभोक्ताओं में भ्रम और डर का माहौल है। कमर्शियल एलपीजी किल्लत ने छोटे-छोटे ढाबा संचालक को परेशान कर दिया है। ढाबा संचालकों को कमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है। एक ढाबा संचालक ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी जो पहले 1900 का मिलता था अब वो 3500 का मिल रहा है। एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और लोगों की नाराजगी के बीच कीर्ति नगर एचपी गैस एजेंसी के मालिक कशिश ने बताया कि शहर में घरेलू गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए लोगों को घबराने या पैनिक बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है। कशिश ने कहा कि सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग अवधि बढ़ाकर एक महीना कर दी है। जो लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनकी बुकिंग नहीं हो रही, उन्हें समझना होगा कि अब 30 दिन से पहले सिस्टम बुकिंग स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पीछे से सप्लाई में कुछ तकनीकी बदलाव हुए हैं जिसके कारण बुकिंग पोर्टल पर लोड है।
कमर्शियल सप्लाई ठप, डीजल भट्टी का सहारा
जालंधर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी लगभग रोक दी गई है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि पीछे से यानी बॉटलिंग प्लांट से ही कमर्शियल सिलेंडर की खेप नहीं आ रही है। इसका सीधा असर शहर के खान-पान के कारोबार पर पड़ा है। डीसी दफ्तर के पास ढाबा चलाने वाली कमलेश ने बताया कि सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें अब डीजल भट्टी जलानी पड़ रही है। डीजल भट्टी न केवल महंगी पड़ती है, बल्कि इससे खाना बनाने में भी समय अधिक लगता है और धुएं की समस्या भी होती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कमर्शियल सप्लाई को तुरंत बहाल किया जाए ताकि गरीब रेहड़ी-फड़ी वालों का चूल्हा जल सके।