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2030 तक अरावली संरक्षण के लिए हरियाणा की ठोस कार्ययोजना, ग्रीन वॉल परियोजना पर तेजी से काम: राव नरबीर सिंह - Uturn Time
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मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण व सूखे की चुनौती से निपटने में अरावली बनेगी प्राकृतिक ढाल प्रधानमंत्री के मिशन 'लाइफ' और ‘एक पेड़ मां के नाम’ से प्रेरित योजनाओं को हरियाणा में मिल रहा विस्तार चंडीगढ़, 1 जनवरी — हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण के प्रति पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार हरियाणा अरावली ग्रीन वॉल परियोजना पर प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस परियोजना को वर्ष 2030 तक क्रियान्वित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। वन मंत्री ने कहा कि हरियाणा वह पावन भूमि है जहाँ से वैदिक सभ्यता की शुरुआत हुई, वेदों की रचना हुई और जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध से पूर्व गीता का दिव्य उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) तथा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसी ऐतिहासिक पहलें शुरू की गईं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है। ये पहलें वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर लोगों को स्थायी जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने ऑक्सी वन, प्राण वायु देवता योजना और वन मित्र योजना जैसी अभिनव पहलें शुरू की हैं, जिनके माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये योजनाएं अरावली संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कड़ी साबित होंगी। वन मंत्री ने बताया कि दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नारनौल, चरखी दादरी, बाढड़ा, लोहारू और केरू क्षेत्रों में जाटी एवं रोहिड़ा जैसे स्थानीय वृक्षों के संरक्षण के लिए किसानों को प्राण वायु देवता योजना की तर्ज पर वार्षिक मानदेय देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि अरावली क्षेत्र में हरियाली बनी रहे और स्थानीय लोग संरक्षण से सीधे जुड़ सकें। अरावली हरियाणा के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ राव नरबीर सिंह ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला का हरियाणा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पारिस्थितिक महत्व है। यह पर्वतमाला मरुस्थलीकरण के विरुद्ध एक प्राकृतिक ढाल के रूप में कार्य करती है तथा जैव विविधता, जल सुरक्षा और जलवायु संतुलन का महत्वपूर्ण स्रोत है। अरावली भूजल पुनर्भरण, वायु गुणवत्ता सुधार, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में आजीविका को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला को विश्व स्तर पर एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के परिदृश्य के रूप में स्वीकार किया गया है, जो मानव और प्रकृति के गहरे संबंध का प्रतीक है। वन मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के माध्यम से राजस्थान, गुजरात और दिल्ली सहित सभी अरावली राज्यों के साथ सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम अरावली जैव विविधता पार्क जैसी परियोजनाएं पारिस्थितिकी तंत्र बहाली का सफल मॉडल हैं, जिसे भारत का पहला ओईसीएम (अन्य प्रभावी क्षेत्र आधारित संरक्षण उपाय) भी घोषित किया गया है, जो आईयूसीएन के वैश्विक दिशानिर्देशों की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि जहां युवाओं को इस नेक कार्य से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य भर में ग्राम स्तर पर वन मित्रों की नियुक्ति की गई है। वहीं, प्राण वायु देवता योजना के तहत 75 वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों को ₹2500 वार्षिक पेंशन दी जा रही है। शहरी क्षेत्रों में वायु शुद्धता बढ़ाने और मरुस्थलीकरण रोकने के लिए ऑक्सी वन स्थापित किए जा रहे हैं। राव नरबीर सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर दी गई नई परिभाषा का हरियाणा स्वागत करता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अरावली क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को संरक्षित रखने का प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का उद्देश्य अरावली क्षेत्र में हरित रोजगार सृजन, जन भागीदारी बढ़ाना और जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण अनुकूल संसाधन प्रबंधन को सशक्त बनाना है।