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बाढ़ नियंत्रण के लिए 637.25 करोड़ रुपये की 388 योजनाओं को मंजूरी नदियों के तटबंध होंगे और मजबूत, भूमि कटाव रोकने के लिए यूपी की तर्ज पर बनेंगे स्टोन स्टड बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें जिला उपायुक्त चंडीगढ़, 31 दिसंबर – हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पूर्व प्रदेश में जलभराव व बाढ़ की संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सभी ड्रेनों की समय रहते सफाई सुनिश्चित की जाए। यदि किसी परियोजना में देरी या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें। मुख्यमंत्री आज हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 57वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में 637.25 करोड़ रुपये की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित की गई 102 करोड़ रुपये की 59 योजनाएं भी शामिल हैं। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 तथा उसके बाद वर्ष 2025 में प्रदेश में जलभराव व बाढ़ की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। इनसे सबक लेते हुए अभी से बाढ़ राहत कार्यों की ठोस योजना तैयार कर ड्रेनों की सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जहां भी किसी प्रकार की समस्या हो, वहां तत्काल आवश्यक कार्य करवाएं, क्योंकि अभी पर्याप्त समय उपलब्ध है। नदियों के तटबंध होंगे और मजबूत, भूमि कटाव रोकने के लिए यूपी की तर्ज पर बनेंगे स्टोन स्टड मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के किनारे तटबंधों को मजबूत करने तथा भूमि कटाव रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मजबूत स्टोन स्टड बनाए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि इस वर्ष सभी स्टड नई तकनीक से लगाए जाएं ताकि बाढ़ राहत कार्यों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। साथ ही, उन्होंने बजरी से भरे कट्टों को तैयार रखने के निर्देश दिए ताकि जिन स्थानों पर अत्यधिक जल प्रवाह से कटाव की आशंका हो, वहां तुरंत उनका उपयोग किया जा सके। मुख्यमंत्री ने गत 10 वर्षों में विभाग द्वारा किए गए स्टोन स्टड कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। किसी भी स्थिति में यमुना में न जाए गंदा पानी मुख्यमंत्री ने यमुना नदी में सीवेज व नालों का प्रदूषित पानी गिरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी ड्रेन से यमुना में पानी केवल ट्रीटमेंट के बाद ही छोड़ा जाए। इसके लिए सभी आउटफॉल प्वाइंट्स को चिन्हित कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) एवं सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि अनट्रीटेड पानी यमुना में न जा सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भिवानी-घग्गर ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के कार्य को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत से संबंधित उन योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की, जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए तथा जनवरी माह के अंत तक सभी योजनाओं के टेंडर अनिवार्य रूप से लगा दिए जाएं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी। नायब सिंह सैनी ने ट्रीटेड वॉटर के कृषि उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभाग मिलकर ऐसी योजनाएं तैयार करें, जिनके माध्यम से ट्रीटेड पानी खेतों तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रीटेड वॉटर का दोबारा उपयोग, चाहे उद्योगों में हो या कृषि में, सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा, पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और शहरी संपदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. साकेत कुमार, मुख्यमंत्री के ओएसडी श्री भारत भूषण भारती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।