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“बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभानल्लाह” जैसे कारपोरेशन इंस्पेक्टरों के हालात - Uturn Time
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बिल्डिंग इंस्पेक्टरों ने चालान बुक को बनाया करप्शन का सुरक्षा कवच राजदीप सिंह सैनी लुधियाना/यूटर्न/5 मार्च। लुधियाना कारपोरेशन में आए दिन निगम अधिकारियों के करप्शन को लेकर अनोखे तरीके देखने को मिलते हैं। जहां पहले बड़े साहब, पूर्व कमिश्नरों, पूर्व एसई संजय कंवर व अन्य कुछ अधिकारियों पर करप्शन करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। वहीं अब इस भ्रष्टाचार के खेल में बिल्डिंग इंस्पेक्टर भी कहीं पिछे नहीं है। बड़े अधिकारियों के साथ साथ निगम के कुछ बिल्डिंग इंस्पेक्टर भी जमकर चांदी कूटने में लगे हुए हैं। जिसके चलते इन पर यह कहावत फिट बैठती है कि बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभानल्लाह। चर्चाएं हैं कि कुछ बिल्डिंग इंस्पेक्टरों द्वारा धड़ल्ले से अपने इलाकों में अवैध इमारतें बनवाई गई और अभी भी बनवाई जा रही हैं। इंस्पेक्टरों द्वारा आपसी सेटिंग के बाद दिखावे के लिए बिल्डिंगों का चालान तो जरुर काटा जाता है, लेकिन उसकी कंपाउंडिंग फीस सरकारी खाते में जमा नहीं करवाई जाती। कई मामलों में तो चालान भी गायब कर दिए जाते हैं। जिससे बिल्डिंग मालिक का काफी पैसा भी बच जाता है और इंस्पेक्टरों की जेब भर जाती है। यह गोलमाल आज से नहीं बल्कि पिछले कई सालों से चल रहा है। ऐसे करके इंस्पेक्टर चालान बुक को अपनी करप्शन का सुरक्षा कवच बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह करके कई भ्रष्ट इंस्पेक्टरों द्वारा सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया गया। जिसके चलते सभी चालानों का ऑडिट कराना जरुरी है। जिससे कई बड़े घोटाले निकलकर सामने आएंगे। ऐसे गोलमाल कर रहे इंस्पेक्टर चर्चा है कि कारपोरेशन के चारों जोन में से अगर कहीं भी इललीगल इमारत बनती है, तो संबंधित जोन का इंस्पेक्टर मौके पर जाता है। पहले तो आपसी मिलीभगत के इमारत बनने दी जाती है। जिसके बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचने या मीडिया में आने पर इंस्पेक्टर उसका चालान काट देते हैं। जिसके बाद बिल्डिंग मालिक से सेटिंग होने पर चालान जेब में ही रख लिया जाता है। अगर न सेटिंग हो तो मालिक को ऑफिस बुलाया जाता है। अधिकारियों के दोबारा पूछने पर इंस्पेक्टर चालान होने का बोलकर बात संभाल लेते हैं, लेकिन चालान के बाद कंपाउंडिंग फीस जमा हुई या नहीं यह कोई नहीं देखता। ज्यादातर मामलों में यहीं चीजें निकलकर सामने आई है कि इंस्पेक्टरों ने चालान करके अपनी रिश्वत जेब में डाल ली और कंपाउंडिंग फीस जमा ही न हीं करवाई। 25 साल का ऑडिट होने पर कई मगरमच्छ जाल में फंसेगें चर्चा है कि इंस्पेक्टरों का यह खेल आज से नहीं बल्कि पिछले 25 सालों से चला आ रहा है। जिसके चलते पंजाब सरकार और उच्च अधिकारियों को 25 सालों के चालान व जमा हुई कंपाउंडिंग फीस का ऑडिट कराना चाहिए। जिससे कई मगरमच्छ जाल में फंस सकेगें। इसी के साथ साथ सरकार का खजाना भी भरेगा। आप सरकार अगर ऐसा करती है तो विकास कार्यों के लिए भारी मात्रा में फंड इकट्‌ठा हो सकेगा। लुधियाना ही नहीं चंडीगढ़ के अधिकारियों को भी दे रहे गच्चा वहीं चर्चा है कि बिल्डिंग इंस्पेक्टरों द्वारा इस चालान के खेल में अकेले लुधियाना ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ बैठे लोकल बॉडी विभाग के अधिकारियों को भी गच्चा दे दिया जा रहा है। चर्चा है कि इन मामलों में अगर चंडीगढ़ सीवीओ विभाग, कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और विधायक भी पूछताछ करें तो इंस्पेक्टरों द्वारा चालान कर देने की बात कह दी जाती है, मगर कंपाउंडिंग फीस जमा करवाई जा नहीं, यह नहीं बताया जाता। वहीं कई इमारतों के तो चालान ही नहीं दिखाए जाते। कई एमटीपी व एटीपी भी रह चुके सेटिंग का हिस्सा जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टरों की चालान बुक को कमिश्नर से लेकर एटीपी तक कोई भी चैक कर सकता है। लेकिन इसकी चैकिंग का मुख्य काम एमटीपी व एटीपी का होता है। लेकिन चर्चा है कि पिछले 25 सालों के दौरान कई एमटीपी व एटीपी की इंस्पेक्टरों के साथ मिलीभगत रही। जिसके चलते सभी ने मिलकर रिश्वत का खेल खेला। अब अगर चैकिंग करने वाले खुद ही भ्रष्टाचार में लिपित हो गए, तो एक्शन कौन लेता। जिसके चलते चालान की एवज में जमकर घोटाले किए गए। ----