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लुधियाना/यूटर्न/13 फरवरी। ग्लाडा की और से शहर में पिक एंड चूज पॉलिसी इस्तेमाल की जा रही है। दरअसल, साउथ सिटी रोड पर नशेनल हाइवे के नियमों को पूरा न करने के चलते ग्लाडा द्वारा ज्यादातर इमारतों को इललीगल करार करते हुए नोटिस निकाल दिया। लेकिन एक तरफ तो ग्लाडा पहले से बनी इमारतों को गलत बताते हुए एक्शन लेने की तैयारी में हैं। जबकि साउथ सिटी रोड पर ही एक नई बिल्डिंग का सरेआम निर्माण किया जा रहा है। लेकिन उस पर न तो ग्लाडा एक्शन ले रहा है और न ही ग्लाडा के अधिकारियों को उक्त निर्माण दिख पा रहा है। जिसके चलते चर्चा है कि ग्लाडा अधिकारियों द्वारा पिक एंड चूज पॉलिसी इस्तेमाल करते हुए यह अवैध कार्य करवाया जा रहा है। चर्चा है कि इस नए निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। इसी लिए अभी तक ग्लाडा एक्शन नहीं ले पाया है। 200 से ज्यादा इमारतों को जारी हो चुके नोटिस जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले ग्लाडा द्वारा साउथ सिटी रोड पर मौजूद इमारतों को इललीगल बताते हुए 200 से ज्यादा को नोटिस जारी कर दिए थे। हालांकि उक्त बिल्डिंग मालिकों ने ग्लाडा द्वारा उन्हें जारी की एनओसी भी पेश की। लेकिन अधिकारी उक्त एनओसी को जाली बताते हुए पीछे हट गए। जिसके बाद बिल्डिंग मालिकों ने कोर्ट का रुख किया। लेकिन अब उसी रोड पर नया निर्माण जारी है, मगर ग्लाडा उसे रोक नहीं पा रहा। सीए की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में वहीं ग्लाडा के सीए संदीप कुमार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ चुकी है। क्योंकि सीए संदीप कुमार के कार्यकाल के दौरान ग्लाडा के अधीन जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है। वहीं चर्चा है कि सीए संदीप कुमार के चार्ज लेने के बाद ग्लाडा के अधीन आती कॉलोनियों को उनकी बनती सुविधा नहीं मिल पा रही। चर्चा है कि कॉलोनी मालिकों द्वारा कॉलोनियों के बाहर से गुजरती सड़कें बनवाने के लिए ग्लाडा को चार्ज भी जमा करवाए जा चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही। वहीं ताजा मामला एआईपीएल का सामने आया है। जिसने पूरे चार्ज जमा करवाए और सड़क अभी तक नहीं बन सकी। खबरें प्रकाशित होने के बाद ही जागता है प्रशासन वहीं ग्लाडा के अधिकारियों द्वारा पहले तो एक्शन नहीं लिया जाता। लेकिन जब उनकी खबरें प्रकाशित होती हैं, तो तुरंत प्रभाव से एक्शन शुरु हो जाता है। हैरानी की बात तो यह है कि क्या ग्लाडा अधिकारियों की खुद की सेल्फ जिम्मेदारी क्यों नहीं है। आखिर वह खुद ही इन अवैध कार्यों को देखकर एक्शन क्यों नहीं लेते। एक तरफ नोटिस, दूसरी तरफ इमारतें बन रही वहीं एडवोकेट आदित्य जैन ने कहा कि एक तरफ तो ग्लाडा द्वारा बिल्डिंग मालिकों को नोटिस निकाल दिए। जबकि उसी सड़क पर नई इमारतें बन रही है। आखिर ग्लाडा दोहरी नीति क्यों अपना रहा है। अगर पहले बिल्डिंगें गलत थी, तो अब कैसे बन रही है। अगर अब सही है तो पहले 200 इमारतों को नोटिस क्यों निकाले। ग्लाडा को इसका जवाब देना चाहिए। क्या मंत्री ले पाएंगे एक्शन वहीं लुधियाना से विधायक और फिर मंत्री बने संजीव अरोड़ा के पास लोकल बॉडी विभाग पंजाब का चार्ज है। अब देखना होगा कि क्या मंत्री अरोड़ा इन अवैध निर्माणों पर एक्शन ले सकेगें या नहीं। वहीं अगर व्यक्ति गलत काम करें तो सरकार तुरंत एक्शन लेती है, मगर अब देखना होगा कि ग्लाडा अधिकारी कार्रवाई न करके अवैध कार्य करवा रहे हैं, तो उन पर क्या एक्शन लिया जाता है। ----