— पहचान से बचने के लिए आईईडी बनाने में धातु की केसिंग की बजाय पीवीसी पाइप का किया गया इस्तेमाल: डीजीपी गौरव यादव
— गिरफ्तार आरोपी एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स के जरिए अपने विदेशी हैंडलर के संपर्क में था: एआईजी एसएसओसी सुखमिंदर मान
नवीन गोगना
अमृतसर, 10 फरवरी — मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार पंजाब को सुरक्षित राज्य बनाने के लिए चलाई जा रही मुहिम के तहत, खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) अमृतसर ने एक आरोपी को आरडीएक्स आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के साथ गिरफ्तार कर पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। यह जानकारी आज यहां पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने दी।
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान राहुल कुमार उर्फ गज्जू, निवासी चमरंग रोड, अमृतसर के रूप में हुई है। वह अमृतसर के एक सैलून में सहायक के तौर पर काम करता है।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देशों पर काम कर रहे एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी राहुल ने अपने विदेशी हैंडलर के निर्देश पर शहर के बाहरी इलाके में एक तय स्थान से खेप प्राप्त की थी।
उन्होंने आगे बताया कि डिवाइस को पहचान से बचाने के लिए धातु की बजाय पीवीसी पाइप की केसिंग में छिपाया गया था। डीजीपी ने कहा कि आईईडी की सप्लाई के स्रोत का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए एआईजी एसएसओसी अमृतसर सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि पाकिस्तान से आईईडी की खेप भेजे जाने संबंधी विश्वसनीय खुफिया सूचना मिलने पर पुलिस टीमों ने ऑपरेशन चलाया और संदिग्ध राहुल उर्फ गज्जू को आईईडी समेत गिरफ्तार कर लिया।
एआईजी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी वर्ष 2022 में अपने विदेशी हैंडलर के पंजाब दौरे के दौरान उसके संपर्क में आया था और दोनों एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स के जरिए संपर्क में रहते थे। उन्होंने कहा कि विदेशी हैंडलर ने शुरू में राहुल को छोटे-छोटे खर्चों के लिए पैसे देकर उसे अपने जाल में फंसाया और बाद में काम सौंपा।
उन्होंने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है।
इस संबंध में एफआईआर नंबर 08 दिनांक 09.02.2026 को थाना एसएसओसी अमृतसर में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 और 61(2) के तहत दर्ज की गई है।