विरोध करने वालों को स्टांप देने से किया जा रहा इनकार, तहसील परिसर में चल रहे कथित फर्जीवाड़े पर प्रशासन हरकत में; एसडीएम ने जांच के आदेश देकर अवैध वसूली पर कड़ी कार्रवाई का दिया भरोसा।
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : तहसील परिसर में इन दिनों स्टांप वेंडर्स खुलेआम आम जनता की जेबों पर डाका डाल रहे हैं। निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक कीमत वसूलकर वेंडर जमकर चांदी काट रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। पड़ताल में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि तहसील के अंदर 100 रुपये वाला स्टांप पेपर 150 रुपये में और 500 रुपये वाला स्टांप पेपर 550 से 600 रुपये तक में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
लूट का यह काला खेल सिर्फ महंगे स्टांप बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बैकडेट (पुरानी तारीख) में स्टांप जारी करने का बड़ा फर्जीवाड़ा भी यहां सक्रिय है। यदि किसी व्यक्ति को पुरानी तारीख का ऑफलाइन स्टांप पेपर चाहिए, तो ये वेंडर उसे भी पिछली तारीखों में जारी कर देते हैं। इस गैरकानूनी काम के एवज में महज 100 या 500 रुपये के स्टांप के लिए 5,000 से लेकर 10,000 रुपये तक की मोटी रकम वसूली जा रही है। वेंडर्स की तानाशाही इस कदर हावी है कि जब कोई नागरिक इस अवैध वसूली का विरोध करता है या बहस करता है, तो उसे स्टांप पेपर देने से ही साफ इनकार कर दिया जाता है।
इस अंधेरगर्दी और सरेआम हो रही लूट के मामले को जब जगरांव के उप मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) बादल दीन के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्धारित कीमत से अधिक पैसे वसूलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में आ गया है और वह स्वयं इसकी गहन पड़ताल करेंगे। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पुरानी तारीख के ऑफलाइन स्टांप बेचने वाले वेंडर्स के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे दोषियों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएंगे।