लुधियाना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे बताए। लिवासा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अनुसार यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके डोनर का ब्लड ग्रुप अलग होता है। 2017 में सफल ट्रांसप्लांट कराने वाले वीर सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी रहे हैं।
लुधियाना : "एबीओ-इनकम्पैटिबल (विभिन्न ब्लड ग्रुप वाले) किडनी ट्रांसप्लांटेशन एंड-स्टेज किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज की तस्वीर बदल रहा है। इस तकनीक से ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज बेहतरीन किडनी फंक्शन के साथ स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी रहे हैं।"
गुरुवार को लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली की सीनियर डायरेक्टर- नेफ्रोलॉजी ,डॉ. राका कौशल ने कहा कि एंड-स्टेज किडनी रोग, क्रोनिक किडनी डिजीज का अंतिम चरण होता है, जिसमें गुर्दे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने की अपनी क्षमता पूरी तरह खो देते हैं। इस स्थिति में मरीजों को जीवित रहने के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।
उन्होंने आगे कहा, "भारत में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारण किडनी रोग के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि डायलिसिस जीवन को बनाए रखने में मदद करता है, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट ही सबसे बेहतर दीर्घकालिक इलाज है, जो बेहतर सर्वाइवल, जीवन की बेहतर गुणवत्ता और अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।"
सीनियर डायरेक्टर-यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, डॉ. अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांटेशन के जरिए डोनर और रेसिपिएंट का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होने पर भी सफल ट्रांसप्लांट संभव हो पाता है।
इस अवसर पर, 2017 में लिवासा मोहाली में सफल एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नया जीवन पाने वाले वीर सिंह ने भी पिछले 9 वर्षों से स्वस्थ जीवन जीने का अपना अनुभव साझा किया।