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पंजाब के बाद हरियाणा में भी कांग्रेस का मुकाबला कांग्रेस से - Uturn Time
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चंडीगढ़/यूटर्न/9 जुलाई। पंजाब में कांग्रेस आलाकमान को गुटबाजी का सामना करना पड़ा था, जहाँ नेताओं के एक धड़े ने राज्य पार्टी प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बने रहने पर सवाल उठाए थे। अब पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी इसी तरह की दरारें सामने आई हैं। हरियाणा कांग्रेस के नए इंचार्ज संजय दत्त द्वारा बुलाई गई पहली ओपन-हाउस मीटिंग में वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के कामकाज को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें रखीं, जिससे राज्य इकाई के भीतर गहरी गुटबाजी उजागर हुई। चंडीगढ़ में हुई इस बैठक में हरियाणा कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेता शामिल हुए, जिनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा, रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला शामिल थे। नई लीडरशिप के तहत एकजुटता दिखाने के बजाय, चर्चाओं में संगठनात्मक मुद्दों और राज्य में पार्टी के सत्ता में वापसी न कर पाने के कारणों को लेकर अंदरूनी असंतोष उभरकर सामने आया। सांसद ने रखी बेबाकी से बात बैठक में सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा ने सबसे बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी की लगातार चुनावी हार एक गंभीर सवाल खड़ा करती है और तर्क दिया कि सबसे बड़ी चुनौती ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बंटाव है। उनके अनुसार, हर नया राज्य इंचार्ज एकजुटता की अपील के साथ शुरुआत करता है, लेकिन ये आश्वासन शायद ही कभी ज़मीनी स्तर पर अमल में आते हैं। संगठन भीतर की राजनीति खिलाफ आवाज़ उठाई पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने भी संगठन के भीतर व्यक्ति-केंद्रित राजनीति के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता की पहचान किसी व्यक्ति विशेष के प्रति निष्ठा के बजाय पार्टी की विचारधारा से जुड़ी होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मतभेदों को कम करके आंकने की कोशिश करते हुए कहा कि परिवारों में भी असहमति होती है। हालाँकि, उन्होंने नए इंचार्ज से आग्रह किया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को एक आक्रामक राजनीतिक कार्यक्रम दें, जिससे नेता और कार्यकर्ता बीजेपी सरकार के खिलाफ सड़कों पर एकजुट हो सकें। दीपेंद्र हुड्डा ने किया समर्थन रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार केवल जनता के जनादेश से सत्ता में नहीं आई है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी भी दी और आरोप लगाया कि विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के वोट कम करने की कोशिशें की जा सकती हैं। सभा को संबोधित करते हुए संजय दत्त ने सुलह-सफाई वाला रुख अपनाने की कोशिश की और इस बात पर ज़ोर दिया कि संगठन को मज़बूत करना ही सबसे ज़रूरी काम है। उन्होंने नेताओं से मिल-जुलकर काम करने, समाज के सभी वर्गों तक पार्टी की पहुँच बढ़ाने और एकजुटता दिखाने का आग्रह किया, ताकि कांग्रेस हरियाणा में बीजेपी को चुनौती दे सके। पार्टी संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही ये घटनाक्रम कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील समय पर हो रहे हैं, क्योंकि पार्टी उत्तर भारत में संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। पंजाब और हरियाणा, दोनों ही जगहों पर कुछ ही दिनों के अंतराल में असंतोष खुलकर सामने आने के बाद, पार्टी नेतृत्व के सामने भविष्य के चुनावी मुकाबलों की तैयारी के साथ-साथ पार्टी के भीतर एकजुटता बहाल करने की चुनौती है। ----