अदालत ने साक्ष्य मिटाने और झूठी सूचना देने की धाराएं भी लगाईं, 27 नवंबर से शुरू होगी गवाही प्रक्रिया
बठिंडा (Narendra Singh Danu) : बठिंडा के चर्चित कथित हिरासत में मौत मामले में जिला अदालत ने पंजाब पुलिस के पांच कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलविंदर कुमार की अदालत ने इंस्पेक्टर समेत सभी आरोपित पुलिसकर्मियों को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने, अपराधियों को बचाने के लिए गलत सूचना देने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में हेरफेर जैसे आरोपों का सामना करने के आदेश दिए हैं।
अदालत के फैसले के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा।
आरोप तय किए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन सीआईए-1 प्रभारी इंस्पेक्टर नवप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल राजविंदर सिंह और कांस्टेबल गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह व जसविंदर सिंह शामिल हैं। यह मामला अक्टूबर 2024 में गांव लखी जंगल निवासी भिंदर सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है।
पुलिस ने बताया था झील में डूबने का मामला
पुलिस का दावा था कि 17 अक्टूबर 2024 को अवैध हथियार रखने के मामले में भिंदर सिंह की तलाश की जा रही थी। पुलिस टीम को देखकर वह बंद पड़े गुरु नानक देव थर्मल प्लांट की झील में कूद गया था। पुलिस के अनुसार उसे बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, मृतक के भाई सतनाम सिंह ने पुलिस के इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया था कि भिंदर सिंह को हिरासत में लेकर यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उसकी मौत हुई।
न्यायिक जांच में पुलिस दावे पर उठे सवाल
मामले की न्यायिक जांच में पुलिस की डूबने से मौत वाली कहानी पर सवाल उठाए गए। तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुलदीप सिंह की जांच रिपोर्ट में फोरेंसिक साक्ष्यों, मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहियों के आधार पर कई गंभीर तथ्य सामने आने की बात कही गई।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मृतक को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया और यातना दी गई। जांच में वाटरबोर्डिंग जैसी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया, जिसमें व्यक्ति को पानी के जरिए डूबने जैसी स्थिति का अनुभव कराया जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मौत के बाद घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।
मोबाइल लोकेशन और पोस्टमार्टम में देरी पर भी सवाल
जांच के दौरान मृतक और तत्कालीन सीआईए प्रभारी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) में घटना वाले दिन एक ही क्षेत्र में सक्रिय होने की बात सामने आई। इसके अलावा पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी को लेकर भी जांच रिपोर्ट में सवाल उठाए गए।
अब अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। यह मामला पुलिस हिरासत में मौत और पुलिस जवाबदेही से जुड़े पंजाब के प्रमुख मामलों में शामिल माना जा रहा है।