कूड़े के ढेर और आवारा जानवरों से लोग परेशान
शिमला: सफाई व्यवस्था बिगड़ने के बाद नगर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने और सड़कों पर बंदरों व कुत्तों के जमावड़े की शिकायतों के बीच 40 सफाई कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से कचरा समय पर नहीं उठाया जा रहा था, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही थी बल्कि जंगली और आवारा जानवर भी सड़कों पर इकट्ठा हो रहे थे, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
प्रशासन के अनुसार, सफाई कार्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
शिमला में सुबह-सुबह घर-घर से कूड़ा उठाने वाले सैहब सोसायटी के सफाई कर्मी नहीं पहुंच रहे। मॉल रोड, रिज, लोअर बाजार, संजौली, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला और टूटीकंडी जैसे इलाकों में कूड़ा जमा होता जा रहा है। कई जगहों पर बदबू फैलने लगी है और कूड़े के ढेरों के आसपास बंदरों और आवारा कुत्तों की आवाजाही बढ़ गई है। पर्यटक भी शहर की इस हालत को देखकर हैरानी जता रहे हैं।
करीब 32 किलोमीटर के दायरे में फैले शिमला शहर में पिछले छह दिनों से डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन लगभग ठप पड़ा है। सैहब सोसाइटी से जुड़े करीब 800 सफाई कर्मचारी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी बहाल करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि साल की शुरुआत में उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी और 12 हजार रुपये महीने में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
इसी बीच जिला प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को जरूरी सेवा मानते हुए एस्मा लागू कर रखा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, जिसके बाद 40 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया गया। नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने हड़ताली लगभग 40 कर्मचारियों की बर्खास्तगी की पुष्टि की है।
इस बीच, निगम प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मामला और गर्मा गया है। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी मजदूर, सुपरवाइजर या सफाई कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा कि राजभवन और सचिवालय मार्च निकाला जाएगा, जेल भरो आंदोलन होगा, रास्ता रोको और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को मॉल रोड की ओर मोड़ा जाएगा।
मेहरा ने नगर निगम प्रशासन पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि अभी भी समय है कि प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकाले और कर्मचारियों की 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी बहाल करे।
अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए सख्त निगरानी की जाएगी।