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हरियाणा के सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में श्रमदान को अनिवार्य किए जाने का निर्णय
चंडीगढ़: भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिए गए हैं। राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 25 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू होंगी। शिक्षा विभाग के अनुसार, लगातार बढ़ते तापमान और लू के प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि छात्रों की सेहत पर किसी प्रकार का प्रतिकूल असर न पड़े। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि अवकाश के दौरान आवश्यक प्रशासनिक कार्य समय पर पूरे किए जाएं और नई शैक्षणिक सत्र की तैयारियां भी सुनिश्चित की जाएं। बैठक में शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए गए कि शिक्षक कक्षा में मोबाइल फोन लेकर नहीं जाएंगे। शिक्षकों के मोबाइल विद्यालय में प्रधानाचार्य कक्ष में जमा रहेंगे तथा शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। मुख्यमंत्री ने बुधवार को चंडीगढ़ में विद्यालय आधारभूत संरचना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं प्रारंभिक अंग्रेजी विद्यालयों की शुरुआत की। वर्ष 2026-27 के बजट घोषणा के अनुरूप पहले चरण में चिन्हित 250 विद्यालयों का शुभारंभ किया गया। इन विद्यालयों को प्रधानमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय और आदर्श विद्यालयों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। ये विद्यालय हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होंगे तथा इनमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। विद्यालयों में आधुनिक संसाधन, बेहतर आधारभूत ढांचा, प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का चयन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने विद्यालय भवनों और आधारभूत संरचना को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण शाखा को एकीकृत किया जाए तथा स्कूल भवनों का डिजाइन एकरूपता और गुणवत्ता के आधार पर तैयार किया जाए, जिससे अव्यवस्थित संरचनाओं से बचा जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालय भवनों को जर्जर अथवा अनुपयोगी घोषित किया गया है, वहां नए भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। साथ ही विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, बागवानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने खराब एवं अनुपयोगी शौचालयों की शीघ्र मरम्मत तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों की चारदीवारी की मरम्मत को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए तथा जहां तकनीकी अथवा अन्य कारणों से वे संचालित नहीं हो रही हैं,वहां तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी अथवा अनुपस्थिति की स्थिति है, वहां स्मार्ट कक्षाओं और द्वि-दिशात्मक प्रणाली के माध्यम से लाइव कक्षाएं संचालित की जाएं। साथ ही जहां शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नियमित व्यवस्था होने तक सेवा देने के इच्छुक सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं स्वैच्छिक आधार पर ली जा सकती हैं तथा नियमानुसार मानदेय उपलब्ध कराया जा सकता है। अभिभावकों और छात्रों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि गर्मी के कारण स्कूल जाना मुश्किल हो रहा था।