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ED Action Over: कार्रवाई से ज्यादा ‘प्रक्रिया’ पर सवाल, लोकल टीम क्यों रही बाहर ? - Uturn Time
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आधिकारिक बयानों पर टिकी निगाहें
लुधियाना/यूटर्न/19 अप्रैल। पिछले दिनों ईडी की और से लुधियाना, गुरुग्राम और जालंधर में मंत्री संजीव अरोड़ा, कारोबारी हेमंत सूद, चंद्रशेखर अग्रवाल और नीरज सतीजा के यहां रेड की। शनिवार रात तक यह रेड खत्म हो गई । देश की विश्वसनीय न्यूज एजेंसी द्वारा बेशक ऑफिशियलज का हवाला देकर इस रेड को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला बताया। लेकिन ईडी द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक बयान एवं प्रेस रिलीज जारी नहीं की है । हालांकि इस रेड के बाद विभाग की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए है । शहर में चर्चा है कि यह रेड स्पेशल दिल्ली से आई टीम द्वारा की गई। जबकि ईडी का चंडीगढ़ और जालंधर में भी ऑफिस है। लेकिन दिल्ली टीम ने राज्य टीम को इस कार्रवाई में शामिल नहीं किया। जबकि पूरे देश में दिल्ली ईडी ऑफिस के बाद दूसरा बड़ा ऑफिस जालंधर में है। लेकिन फिर भी अधिकारियों द्वारा अपनी ही स्थानीय टीमों को कार्यवाही से दूर रखना बड़े सवाल खड़े कर रहा है। वहीं इस रेड से कुछ दिन पहले ही उच्च अधिकारियों द्वारा पंजाब एवं चंडीगढ़ में तैनात करीब १२ डिप्टी डायरेक्टर, ज्वाइंट डायरेक्टर एवं अस्सिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारीयों की ट्रांसफर भी कर दी गई थी। जिसके चलते चर्चाएं हैं कि शायद दिल्ली टीम को अपनी ही एजेंसी के लोकल अधिकारियों पर विश्वास नहीं रहा है। तभी पूरे एक्शन में जालंधर व चंडीगढ़ के अधिकारियों को दूर रखने की चर्चाएं बनी हुई है । वहीं दिल्ली से स्पेशल टीम का कार्रवाई करने आना भी बड़ा सवाल बना हुआ है। ज्यादातर मामलों में राज्य टीम लेती है एक्शन वहीं चर्चा है कि पंजाब और चंडीगढ़ में अक्सर ईडी द्वारा कार्रवाई की जाती है। ज्यादातर मामलों में चंडीगढ़ और जालंधर की टीमें ही रेड करती है। वही बड़ा एवं पोलिटिकल मामला होने पर दिल्ली की टीमें इन स्टेट में एक्शन लेती है। हालांकि इस दो दिनों की कार्रवाई में अभी तक ऐसा कुछ बड़ा व संगीन मिलने की कोई बात सामने नहीं आई है। ईडी के ज्यादातर मामले सिरे नहीं चढ़ पा रहे वहीं चर्चा है कि ईडी द्वारा पंजाब के कई राज्यों में कई बार रेड की गई है। बेशक ईडी द्वारा पहले मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई तरह के आरोपों के तहत रेड की जाती है। लेकिन फिर बाद में वे मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। चर्चा है कि ईडी के ज्यादातर मामले सिरे न चढ़ पाने के चलते उच्च अधिकारियों को अपनी ही एजेंसी के अफसरों को शक के दायरे में देखा जा रहा है। वहीं चर्चा है कि लोकल टीम होने के चलते संबंधित राज्य के नेताओं और कारोबारियों के साथ अफसरों के अच्छे एवं लिहाज वाले संबंध बन जाते हैं। इस कारण आपसी संपर्क होने के चलते लोकल अधिकारी को शामिल करने से इन्फॉर्मेशन लिक होने एवं उनका बचाव करने की आशंकाएं होती हैं। कार्रवाई के तुरंत बाद बिचौलिए-ठग एक्टिव पिछले कुछ समय से देश में ईडी की कार्रवाई बढ़ गई है। जिसके चलते बिचौलिए और मौका प्र्सत भी पैदा हो गए हैं। जोकि एजेंसी द्वारा जिनपर कार्रवाई की जाती है, कुछ दिन बाद वहीं पर बिचौलिए पहुंच जाते हैं। जिनकी और से ओपन ऑफर देते हुए अफसरों के साथ अच्छी सेटिंग होने का हवाला देकर मामला हल करवाने और समझौता करने का झांसा देकर मोटी रकम वसूल की जा रही है। कौन कौन है बिचौलगिरी में शामिल ईडी से सैटिंग के काम में ज्यादातर खुद भुगत भोगी व्यक्ति , बड़े राजनेता, राजनेताओं के पीए एवं रिटायर्ड अधिकारी , टैक्स प्रैक्टिशनर , एकाउंट्स की देख रेख करने वाले तथाकथित भ्र्ष्ट बिचौलिए बने हुए हैं। क्योकि कार्यकाल दौरन इनके पास हर किसी से मीटिंग का एक्सेस होता है वही कार्यवाही भुगतने एवं राजनितिक समय में निरन्तर मेल जोल से अच्छे सम्बन्ध बना सव्भाविक है जाल बिछाने को मुश्किल कामों को दी जाती है अहमियत चर्चा है कि व्ही विश्वास बढ़ाने और जाल बिछाने को बिचौलिए द्वारा मुश्किल से मुश्किल और बड़े मामला हल कराने के भी दावे किए जा रहे हैं। क्योकि इनमें सैटिंग की रकम और कमाई मोटी रहती है क्योकि ये ज्यादातर है प्रोफ़ाइल लोग होते है जोकि ठगी का शिकार होने पर भी मुँह नहीं खोलते। शायद इसीलिए वर्तमान समय में कई मौकापरस्त ठग भी इस काम में एक्टिव हो चुके हैं। जिनकी और से अफसरों से अच्छी सेटिंग की बात कहकर एडवांस के रुप में पेमेंट लेकर ठगी मारी जा रही है। बिचौलगिरी से दोबारा कार्यवाही की तलवार हट जाती है वहीं चर्चा हैं कि सीबीआई और ईडी की कार्रवाई का शिकार हो चुके लोग भी अब बिचौलिए की भूमिका निभाने लग चुके हैं। दरअसल, उनकी और से अपना मामला सुलझाते हुए अफसरों के साथ अच्छी सेटिंग और लेन देन हो चूका होता है इसलिए ऐसे लोगो दोनों के लिए सुरक्षित माने जाते है। व्ही खुद फंसा व्यक्ति ऐसा करते हुए अपनी रिकवरी और मोटी कमाई का जरिया बना लेता है। वही इससे भविष्य में खुद पर दोबारा कार्यवाही की संभावनाएं भी कम हो जाती है