चंडीगढ़ 24 मार्च : देशभर में बढ़ते तापमान और वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते इस वर्ष बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश की अधिकतम बिजली मांग *दो लाख चालीस हजार मेगावाट* से अधिक जा सकती है, जो पिछले वर्ष के उच्च स्तर से भी ज्यादा है।
पंजाब में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य में गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होने के साथ-साथ कृषि कार्यों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा भीषण गर्मी के कारण घरेलू उपयोग—जैसे कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर—की मांग में भी भारी इजाफा हुआ है।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता पर चलाने के निर्देश दिए हैं। देश के कुल बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी लगभग *सत्तर प्रतिशत* है, जिससे इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पंजाब सरकार और बिजली विभाग ने भी आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। कोयले की उपलब्धता, बिजली खरीद समझौते और ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो पीक समय में दबाव बढ़ सकता है। हालांकि समय रहते उठाए गए कदम संभावित बिजली संकट को टालने में मददगार साबित हो सकते हैं।