पहली बार राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ 150 वर्ष पुरानी विरासत को किया गया याद, एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने की पुष्प वर्षा; प्रधानमंत्री मोदी ने फहराया तिरंगा, 21 तोपों की सलामी और तीनों सेनाओं के संयुक्त गार्ड ने दी राष्ट्रीय सलामी, सेना के बैंड की धुन और सैन्य परंपराओं के बीच ऐतिहासिक लाल किला देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया
नई दिल्ली (Naren Danu) : देश ने ऐतिहासिक लाल किले से आजादी का 80वां पर्व पूरे उत्साह और राष्ट्रीय गौरव के साथ मनाया। इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह कई मायनों में खास रहा। पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया, जिसने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस विरासत को विशेष सम्मान दिया गया। समारोह के दौरान भारतीय वायु सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने लाल किले के ऊपर पुष्प वर्षा की। इनमें एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम्’ अंकित ध्वज लेकर उड़ा। इस विशेष उड़ान का नेतृत्व विंग कमांडर रजत और स्क्वाड्रन लीडर अंकित वार्ष्णेय ने किया।
समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया। इसके बाद तीनों सेनाओं और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल ने प्रधानमंत्री को ‘जनरल सैल्यूट’ दिया। प्रधानमंत्री ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण किया, जिसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के जवान शामिल थे।
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के समन्वय की जिम्मेदारी भारतीय सेना को सौंपी गई थी। ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह ने संभाली। सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस की अलग-अलग टुकड़ियों ने भी समारोह में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री के लाल किले की प्राचीर पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने ध्वजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री की सहायता की। तिरंगा फहराते ही 1721 फील्ड बैटरी के जवानों ने 21 तोपों की सलामी देकर राष्ट्र को सम्मान दिया। स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से दी गई इस सलामी ने समारोह को और भव्य बना दिया।
ध्वजारोहण के बाद सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाई। लाल किले पर मौजूद हजारों लोगों ने राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ समारोह संपन्न हुआ।
80वें स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, सैन्य परंपरा और राष्ट्रीय एकता का एक जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।