प्रधानमंत्री ने उत्पादन, कृषि, तकनीक, बुनियादी ढांचे, रक्षा, हरित अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को राष्ट्र निर्माण की सात प्रमुख धाराएं बताया; कहा- 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हर क्षेत्र की सामूहिक प्रगति से होगा पूरा, देश को बड़े सपने देखने और नई ऊंचाइयों को छूने का दिया संदेश, लाल किले से पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम्’
नई दिल्ली (Naren Danu) : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को सात प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ना होगा। यही सात धाराएं आने वाले वर्षों में भारत की प्रगति की नई दिशा तय करेंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘शक्ति की सप्तधारा’ की पहली कड़ी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने से जुड़ी है। दूसरी धारा कृषि और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि तीसरी धारा तकनीक और नवाचार की है, जो देश की प्रगति को नई गति दे सकती है। चौथी धारा ‘गति शक्ति’ के माध्यम से बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर आधारित है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को पांचवीं धारा बताते हुए कहा कि मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था किसी भी देश की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार होती है। वहीं, छठी धारा हरित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी है, जबकि सातवीं धारा भारत की सॉफ्ट पावर को समर्पित है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज बड़े सपने देख रहा है और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसके सपनों और संकल्पों की ऊंचाई से तय होती है। यदि लक्ष्य बड़े होंगे, तो उपलब्धियां भी बड़ी होंगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई दी, जो देश की एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।