हरियाणा सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को तत्काल प्रभाव से सभी सरकारी संस्थानों में अनिवार्य कर दिया है। सरकार का उद्देश्य फाइलों के निपटान में तेजी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना है। वर्ष 2017 से लागू इस प्रणाली को अब सभी अधीनस्थ कार्यालयों तक पूरी तरह प्रभावी बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों, जिला एवं अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है। अब सभी सरकारी फाइलों और आधिकारिक पत्राचार का निपटान केवल ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों एवं निगमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों तथा विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को निर्देश जारी किए हैं।
जारी आदेशों के अनुसार, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित ई-ऑफिस प्रणाली का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली को पेपरलेस, पारदर्शी, दक्ष और जवाबदेह बनाना है। हरियाणा में यह प्रणाली वर्ष 2017 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है, जिससे फाइलों के निपटान में तेजी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। इसके लिए आवश्यक यूजर आईडी, डिजिटल सिग्नेचर, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी बुनियादी ढांचे की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यों का अधिकतम निपटान डिजिटल माध्यम से किया जाए और भौतिक फाइलों का उपयोग न्यूनतम रखा जाए। आवश्यकता पड़ने पर विभाग एनआईसी हरियाणा, हारट्रॉन अथवा राज्य की ई-ऑफिस सहायता टीम से तकनीकी सहयोग भी ले सकेंगे।
सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।