ओम बिरला और बख्तियार सैदोव के बीच हुई बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने, संसदीय मैत्री समूह की भूमिका बढ़ाने और आर्थिक सहयोग मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। बिरला ने डिजिटल नवाचार, निवेश, कनेक्टिविटी और युवा शक्ति में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया, जबकि सैदोव ने लोकतांत्रिक अनुभवों से सीखने और साझेदारी बढ़ाने की बात कही।
नई दिल्ली (Naren Danu) : भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संसदीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। संसद भवन में मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई।
व्यापार, निवेश और शिक्षा सहयोग पर हुई बात
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने संसदीय सहयोग के साथ-साथ व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और आपसी साझेदारी को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को एक विशेष स्मारिका भेंट की, जिसमें उज्बेकिस्तान की ओर से आयोजित इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन की 150वीं असेंबली से जुड़ी जानकारी शामिल है।
सदियों पुराने रिश्तों को बताया साझेदारी की ताकत
ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता राजनीतिक विश्वास, व्यापारिक विस्तार और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले समय में द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसदीय प्रणाली देश की विविधता और जनता की आकांक्षाओं को प्रभावी रूप से प्रतिबिंबित करती है।
डिजिटल तकनीक और युवा शक्ति पर भारत की उपलब्धियों का जिक्र
लोकसभा अध्यक्ष ने भारत में बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल नवाचार, तकनीकी प्रगति, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं और दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों व संस्थानों के साथ सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
संसदीय मैत्री समूह से बढ़ेगा सहयोग
बैठक में मार्च 2026 में गठित भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का भी जिक्र हुआ। बिरला ने विश्वास जताया कि यह समूह दोनों देशों के विधायी अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा और आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा जनस्तरीय संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
वहीं, बख्तियार सैदोव ने भारत के साथ बहुआयामी संबंधों को और गहरा करने की उज्बेकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ताशकंद भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को विशेष महत्व देता है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के अनुभवों से लाभ उठाना चाहता है।
दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई।