राजनेता के करीबी डीलर एग्रीगेटर का आतंक
लुधियाना/यूटर्न/19 जून। लुधियाना रियल एस्टेट सेक्टर की दिखाई देती चकाचौंद के पीछे कई गहरे राज छिपे हुए हैं। इस सेक्टर में एक्का-दुक्का प्रॉपर्टी डीलर एग्रीगेटर्स ऐसे हैं, जिनकी और से अपनी टोपी दूसरे के सिर पर डालने का फंडा इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल, डीलर्स द्वारा एक डेवलपर की जमीन दूसरे को और दूसरे की जमीन तीसरे को बेचकर मोटी कमाई की जा रही है। इसी हेरफेर में डीलरों द्वारा कमीशन की जगह मार्जन रखकर अपनी तो कमाई कर ली गई है, लेकिन डेवलपर्स और जमींदारों को बीच में फंसाकर छोड़ दिया जा रहा है। अब डीलर खुद लापता हैं। जिस कारण न तो डेवलपर्स के प्रोजेक्ट पूरे हो पा रहे हैं और न ही जमीन मालिकों को उनकी बनती रकम मिल पा रही है। इस कारण रियल एस्टेट की कई कंपनियां इस समय शशोपंज में फंसी हुई है। न तो वे व्यापार कर पा रहे है और न ही डीलर्स से अपना पीछा छुड़वा पा रहे हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि इन डीलर्स द्वारा खड़ी की समस्या से कैसे और कब निजात मिल पाएगी।
डेवलपर्स और जमींदारों को दिखाए जाते हैं बड़े ख्वाब
चर्चा है कि एक्का-दुक्का प्रॉपर्टी डीलर्स की और से डेवलर्स और जमींदारों को बड़े बड़े ख्वाब दिखाए जाते हैं। उनकी और से डेवलपर्स को ज्यादा मात्रा में जमीन खरीदकर डेवलपमेंट करने का लालच दिया जाता है, जिसमें बड़ा मुनाफा होने की बात कही जाती है। इसी तरह जमींदारों को भी जमीनों की अच्छी कीमत के लालच दिए जाते हैं। इसी चक्कर में डेवलपर्स और जमींदार फंस जाते हैं, फिर न तो प्रोजेक्ट पूरे हो पाते है और न ही जमींदारों को पैसा मिल पाता है।
अपना मार्जन रख डेवलपर्स को देते हैं गच्चा
जहां पहले प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा कमीशन पर काम किया जाता था, वहीं कोविड के बाद पैदा हुए इन शातिर डीलर्स की और से कमीशन की जगह सीधे मार्जन रखा जा रहा है। उनकी और से प्रति एकड़ मार्जन फिक्स कर लिया जाता है। अब जो डेवलप 20 से 30 एकड़ जमीन डेवलप करने की क्षमता रखता है, उसे जबरन 80-90 एकड़ जमीन दिला दी जाती है। जबकि उक्त जमीन का बनता मार्जन एडवांस में ले लिया जाता है। पहले तो खुद उसके प्लॉट बिकवाने की बात कही जाती है, लेकिन फिर जब डेवलप जमीन का सौदा कर लेते हैं, तो न तो उसके प्लॉट बिकवाए जाते है और जिन लोगों से जमीन का सौदा हुआ, उन्हें पेमेंट अधूरी दे दी जाती है।
आगे से आगे करवाए जा रहे सौदें
चर्चा है कि डीलर्स द्वारा अपने मार्जन के लिए एक ही डेवलपर को नहीं फंसाया जा रहा, बल्कि एक डेवलपर को जमीन बेचकर फिर उसका आधा माल बिकवाकर उसे ज्यादा मुनाफे में आगे जमीन बेचने का लालच दिया जाता है। फिर दूसरे डेवलपर को इसी तरह लालच देकर तीसरे को जमीन बेच दी जा रही है। जबकि वे तीनों से अपना बराबर का मार्जन रख रहे हैं।
70-80 प्रतिशत डील में शामिल
चर्चा है कि उक्त शातिर डीलर शहर में होने वाली बड़ी 70 से 80 प्रतिशत डील में शामिल हैं। जिस कारण पूरा रियल एस्टेट सेक्टर ही अब उनके इर्द गिर्द घूम रहा है। यहां तक कि अभी भी वे कई अहम डील का हिस्सा है।
राजनेता का नाम हो रहा इस्तेमाल, पीड़ित घर के लगा रहे चक्कर
चर्चा है कि उक्त इक्का दुक्का डीलर एक राजनेता के करीबी है। जिनकी और से राजनेता का नाम इस्तेमाल कर लोगों पर हैवी हो रहे हैं। वहीं इन चुनिंदा डीलरों से पीड़ित लोग तड़के छह बजे ही उनके घरों पर पहुंच रहे हैं। लेकिन न तो वे किसी से मिल रहे है और न ही फोन उठाकर बात कर रहे हैं। लोग लीडरों के घरों पर जाकर आपत्तिजनक शब्दावली तक बोलने को मजबूर हैं। मोटी डील होने के कारण लोग परेशान है और सारा बिजनेस उलझ चुका है।
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