Uturn Time
Breaking
सुबह-सुबह 8 से 10 गाड़ियों में पहुंची सेंट्रल जीएसटी की टीमें, सुधीर फोर्जिंग में दस्तावेजों की जांच शुरू Chandigarh: हरियाणा में आयुष सेवाओं को मिलेगा विस्तार, हिसार आयुष अस्पताल अगस्त 2026 तक होगा शुरू Shimla: हिमाचल कैबिनेट का बड़ा फैसला, 5,600 से अधिक पदों पर होगी भर्ती; आशा वर्करों और शिक्षकों को भी राहत Chandigarh: हरियाणा में लर्निंग लाइसेंस के नियम बदले, अब पहले सीखनी होगी सेफ ड्राइविंग और फर्स्ट एड New Delhi: दिल्ली प्रदर्शन में 65 लोग घायल, आरएमएल अस्पताल में भर्ती; पुलिसकर्मी भी शामिल New Delhi: भारत और बेनिन मिलकर मजबूत करेंगे चुनाव प्रबंधन व्यवस्था, निर्वाचन कर्मियों के प्रशिक्षण पर बनी सहमति New Delhi: राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र के खिलाफ New Delhi: राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा: कृषि, एआई और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति Kolkata: दिल्ली छात्र आंदोलन पर ममता का केंद्र पर हमला, बोलीं- लोकतंत्र में लाठी नहीं, संवाद होना चाहिए Chandigarh: 2027 विधानसभा चुनाव लड़ेंगे अमृतपाल सिंह, 'वारिस पंजाब दे' ने सीएम चेहरा घोषित किया Mohali: एयरोट्रोपोलिस विस्तार के लिए 3,523 एकड़ भूमि अधिग्रहण का अवॉर्ड जारी, किसानों को मिलेंगे 23,457 करोड़ रुपये Chandigarh: बेअदबी केस में एसआईटी के सामने पेश हुए सुखबीर बादल, बोले- जांच में करूंगा पूरा सहयोग
Logo
Uturn Time
चंडीगढ़ 18 Jan । चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बारों को रात तीन बजे तक खुले रखने के प्रस्ताव को लेकर शहर में विरोध तेज़ होने लगा है। सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव शहर की मूल पहचान, अनुशासित जीवनशैली और शांत वातावरण के खिलाफ है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला योजनाबद्ध शहर है, जिसकी पहचान सुव्यवस्थित बाजार, स्वच्छता, हरियाली और संतुलित दिनचर्या से रही है। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले तक शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात नौ बजे तक बंद हो जाते थे और यह परंपरा यहां के सामाजिक ढांचे का स्वाभाविक हिस्सा थी। संगठन ने प्रशासन को बताया कि सुबह के समय सुखना लेक सहित शहर के कई सार्वजनिक स्थलों पर लोग योग, वॉक, रनिंग और साइक्लिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। देर रात तक बारों के संचालन की अनुमति इस स्वस्थ जीवनशैली के बिल्कुल विपरीत है और इससे ‘सिटी ब्यूटीफुल’ की पहचान प्रभावित होगी। युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी संगठन ने गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि देर रात तक चलने वाली बार संस्कृति से युवाओं की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे खेल, शिक्षा और उद्यमिता जैसी रचनात्मक गतिविधियों की जगह देर रात के मनोरंजन को बढ़ावा मिलेगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि चंडीगढ़ के अधिकांश स्थायी निवासी शोरगुल भरी नाइटलाइफ संस्कृति के समर्थक नहीं हैं। शहर की छवि एक सुरक्षित, शांत और परिवार-उन्मुख शहर के रूप में रही है, जिसे इस प्रस्ताव से नुकसान पहुंच सकता है। महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी संगठन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। देर रात ड्यूटी के बाद सुरक्षित घर वापसी, अपराध की आशंका और कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था न होने पर चिंता व्यक्त की गई है। संगठन ने कहा कि नाइटलाइफ विस्तार से पहले कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह फैसला वास्तव में शहर के दीर्घकालिक हित में है या केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। संगठन के अनुसार, अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए शहर की संस्कृति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक हित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा यातायात, शोर-प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर किसी ठोस अध्ययन या स्पष्ट कार्ययोजना के अभाव पर भी आपत्ति जताई गई है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि सभी पहलुओं पर गंभीर मंथन किए बिना बारों को रात तीन बजे तक खोलने का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।