अमृतसर/यूटर्न/15 जून। अमृतसर की अदालत ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को अंतरिम जमानत दे दी। उन पर थाने के अंदर दस्तावेज फाड़ने और अपने एक समर्थक को छुड़ाने की कोशिश करने का आरोप है। इसी मामले में पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थी। पुलिस ने कहा था- उन्होंने हथियार लहराए और केस की फाइलें फाड़ीं। अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता और एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान अमृतसर में दर्ज किया गया कथित झूठा मामला एक बार फिर गलत साबित हुआ है और कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। कलेर ने कहा कि अदालतों में फैसले सबूतों के आधार पर होते हैं, किसी मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर नहीं। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री पहले बड़े-बड़े दावे करते थे, लेकिन अब क्या कहेंगे? उनके मुताबिक, सरकार के मामलों को लेकर अदालतों में लगातार सवाल उठ रहे हैं। कलेर ने दावा किया कि पहले जोबनजीत की गिरफ्तारी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गैर-संवैधानिक और गैर-नैतिक बताया था और अब मजीठिया को भी राहत मिल गई है।
गैरकानूनी जोबनजीत को हिरासत में लिया
कलेर के अनुसार, मजीठिया सिर्फ अपने परिवार और किरती किसान यूनियन के धरने में शामिल होने गए थे। उनका कहना है कि जोबनजीत को पंजाब पुलिस के एक एसएचओ ने गैर-कानूनी तरीके से अपने कमरे में बंद किया था। उसे छुड़ाने के लिए मजीठिया, उनका परिवार और किरती किसान यूनियन धरने पर बैठे थे।
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