Uturn Time
Breaking
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का निधन सेक्स की तलाश में पुरुष मुंबई के कांग्रेस हाउस क्यों पहुँचते हैं ? Chandigarh: श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सम्मान करेंगे: मुख्यमंत्री भगवंत मान New Delhi: दिल्ली दवा खरीद घोटाले में बड़ी कार्रवाई, पूर्व DGHS समेत दो अधिकारी गिरफ्तार New Delhi: प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ Surat: 25 हजार पौधों का मेगा वृक्षारोपण अभियान शुरू, केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने ‘ऑक्सीजन पार्क’ में किया शुभारंभ Kurukshetra: महाराजा अग्रसेन सीनियर पब्लिक स्कूल, दबखेड़ी में विज्ञान पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित Panipat: देश और दुनिया 80 फ़ीसदी बहुमत मेहनतकश जनता के लिए लूट और शोषणकारी व्यवस्था पर टिका Hoshiarpur: अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमके होशियारपुर के डॉ. नरेश कुमार भूम्बला, विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम Hoshiarpur: खून दान और नेत्र दान को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाइए: दविंदर सिंह बाजवा, डीएसपी Hoshiarpur: पंजाबी लेक्चरारों की भर्ती में SC और BC समाज के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: डॉ. करीमपुरी Hoshiarpur: इंटेंसिफाइड पल्स पोलियो अभियान के पहले दिन होशियारपुर में 89,840 बच्चों को पिलाई गई पोलियो रोधी दवा
Logo
Uturn Time
हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में दो आईएएस अधिकारियों पर सख्ती जारी
हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में फंसे दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। राज्य सरकार के बाद अब केंद्र सरकार ने भी उनके निलंबन को अगले छह महीने के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी नवंबर 2026 तक निलंबित रहेंगे। गृह सचिव शैलेश बगौली ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों अधिकारियों का निलंबन आगामी छह माह तक जारी रहेगा। दोनों अधिकारियों को 3 जून 2025 को हरिद्वार भूमि प्रकरण में कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया था और हाल ही में उनके निलंबन का एक वर्ष पूरा हुआ है। नियमानुसार एक वर्ष पूरा होने पर निलंबन की समीक्षा की गई, लेकिन बहाली के बजाय केंद्र सरकार ने इसे जारी रखने का फैसला लिया। इससे संकेत मिलता है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विभिन्न एजेंसियां इसकी विस्तृत जांच में जुटी हैं। 54 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले का मामला— हरिद्वार नगर निगम से जुड़े इस प्रकरण को उत्तराखंड के सबसे बड़े कथित भूमि घोटालों में से एक माना जा रहा है। आरोप है कि करीब 54 करोड़ रुपये की सरकारी भूमि की खरीद और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। इसी मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी और नगर निगम आयुक्त की भूमिका को लेकर कार्रवाई की गई थी। इस मामले की विजिलेंस जांच पूरी हो चुकी है और प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है। हालांकि विस्तृत रिपोर्ट और कथित मनी ट्रेल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे कई सवाल अब भी बने हुए हैं। इसी प्रकरण में निलंबित पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह के मामले में भी फिलहाल राहत की संभावना कम दिखाई दे रही है। उनके निलंबन की समीक्षा लंबित है और आईएएस अधिकारियों के निलंबन विस्तार के बाद माना जा रहा है कि उनके मामले में भी जल्द कोई बड़ा निर्णय नहीं होगा।