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चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी में रीजनल मेडिको-लीगल व पोस्टमार्टम वर्कशॉप ‘मेडलीपीआर’ से रिपोर्टिंग में आएगी पारदर्शिता और विश्वसनीयता चंडीगढ़, 14 जनवरी। मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग को आधुनिक, पारदर्शी और मानकीकृत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी), हरियाणा ने आज चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी में एक क्षेत्रीय वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वर्कशॉप का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने किया। उन्होंने कहा कि मेडलीपीआर सिस्टम मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग में एक बड़ा सुधार लाएगा तथा इसे पैन-इंडिया डिजिटल समाधान के रूप में विकसित करने के लिए न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता है। उद्घाटन सत्र की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, तथा एनआईसी हरियाणा के डीडीजी एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर वरिंद्र सेठ उपस्थित रहे। मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने कहा कि मेडलीपीआर सुरक्षित डिजिटाइजेशन और इंटीग्रेशन के माध्यम से मेडिको-लीगल रिकॉर्ड में देरी, मानकीकरण और प्रामाणिकता से जुड़ी समस्याओं का समाधान करेगा। वहीं, एसीएस सुधीर राजपाल ने राज्यों से फीडबैक लेकर प्लेटफॉर्म को और सशक्त बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान मेडलीपीआर कम्पेंडियम का अनावरण और मेडलीपीआर मोबाइल एप का सॉफ्ट लॉन्च भी किया गया। वर्कशॉप में विभिन्न राज्यों के नोडल अधिकारियों ने अपनी कार्ययोजनाएं, चुनौतियां और आगे की रणनीति साझा की, जिससे देशभर में एकसमान और भरोसेमंद मेडिको-लीगल रिपोर्टिंग की दिशा मजबूत हुई।