14.1.2026
विक्रेताओं से बने, क्या प्यारे संबंध।
तभी प्लास्टिक डोर पर, नहीं सख़्त प्रतिबंध।
नहीं सख़्त प्रतिबंध, बिक रही खुल्लम खुल्ला।
वाट्सएप पर कहें, मिले घर बैठे गुल्ला।
कह साहिल कविराय, बचे ख़ुद जनता सारी।
बिल्कुल भी है नहीं, हमारी ज़िम्मेदारी।
प्रस्तुति --- डॉ. राजेन्द्र साहिल