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चंडीगढ़ 13 Jan : क्विक-कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ब्लिंकिट, जेप्टो और जोमैटो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने अब अपनी ‘10 मिनट में डिलीवरी’ वाली ब्रांडिंग हटाने पर सहमति जता दी है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद लिए गए इस फैसले को गिग वर्कर्स की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर संतोष जताते हुए इसे लाखों डिलीवरी राइडर्स की जीत बताया है।राघव चड्ढा ने कहा कि तेज डिलीवरी के वादे का सबसे बड़ा दबाव डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ता था। कपड़ों, बैग और मोबाइल स्क्रीन पर लगातार चलता टाइमर उन्हें जोखिम उठाने के लिए मजबूर करता था। कई बार यह दबाव जानलेवा साबित हो सकता था। उन्होंने केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह फैसला समय पर लिया गया और इससे सड़कों पर चलने वाले हर नागरिक की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने लिखा कि जब किसी राइडर की जैकेट या बैग पर ‘10 मिनट’ लिखा हो और ग्राहक की स्क्रीन पर उलटी गिनती चल रही हो, तो यह सिर्फ एक मार्केटिंग लाइन नहीं, बल्कि राइडर के लिए लगातार बना रहने वाला दबाव होता है। उन्होंने इसे अव्यावहारिक और अमानवीय करार दिया। आप सांसद ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर्स से बातचीत की। कई राइडर्स ने बताया कि वे लंबे समय तक काम करते हैं, लेकिन कम आमदनी के चलते मजबूरी में तेज रफ्तार और जोखिम भरे हालात में डिलीवरी करने को मजबूर होते हैं। इसी फीडबैक के आधार पर उन्होंने सरकार के सामने यह मुद्दा मजबूती से उठाया। इस मुद्दे को जमीन पर समझने के लिए राघव चड्ढा खुद एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट भी बने। पीली यूनिफॉर्म पहनकर, डिलीवरी बैग के साथ उन्होंने ट्रैफिक, समय सीमा, ऊंची इमारतों में फ्लैट तलाशने और लिफ्ट के इंतजार जैसी चुनौतियों का अनुभव किया। बाद में उन्होंने इस अनुभव का वीडियो साझा करते हुए लिख बोर्डरूम से दूर, जमीनी हकीकत में। मैंने उनका एक दिन जिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘10 मिनट डिलीवरी’ ब्रांडिंग हटने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों को अपने मॉडल पर दोबारा सोचने का मौका मिलेगा और राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सकेगी। यह फैसला गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। राघव चड्ढा ने अंत में कहा कि यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि गिग वर्कर्स की गरिमा, सुरक्षा और उचित मेहनताना सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक अहम शुरुआत है।