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Kolkata: बंगाल में 59 साल बाद सत्ता की बागडोर पुराने क्षेत्र के नेता को - Uturn Time
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"सियासत में ऐतिहासिक वापसी, 59 साल बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी"
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। करीब 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिले से जुड़े नेता को राज्य की सत्ता की कमान मिली है। करीब छह दशक पहले भी इसी क्षेत्र से एक नेता ने राज्य की बागडोर संभाली थी, जिसके बाद अब यह मौका दोबारा आया है। करीब 59 वर्ष पहले पूर्व मेदिनीपुर के ही नेता अजय कुमार मुखर्जी ने तामलुक और आरामबाग—दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव जीतकर राज्य की सत्ता संभाली थी। उस समय उन्होंने तामलुक में भाकपा के उम्मीदवार विश्वनाथ मुखर्जी को हराया था, जबकि आरामबाग में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रफुल्ल चंद्र सेन को पराजित किया था। अब लगभग वैसी ही स्थिति फिर देखने को मिली है। इस बार शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम—दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की। भवानीपुर में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार और तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पराजित किया। इसी कारण कई लोग इसे इतिहास की एक रोचक समानता बता रहे हैं। इतिहास बताता है कि अजय कुमार मुखर्जी पहले बिधान चंद्र राय की मंत्रिपरिषद में तीन बार मंत्री रहे थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर ‘बंगला कांग्रेस’ नाम से नया दल बनाया और 1967 में चुनाव जीतकर संयुक्त मोर्चा सरकार के पहले मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनकी सरकार का कार्यकाल अधिक समय तक नहीं चला और कुछ महीनों में ही गिर गई। बाद में वे दोबारा भी मुख्यमंत्री बने, लेकिन तब भी उनका कार्यकाल छोटा ही रहा। राजनीतिक संघर्ष के मामले में भी दोनों नेताओं के बीच कई समानताएं बताई जा रही हैं। शुभेंदु अधिकारी ने 2020 में ममता बनर्जी की सरकार से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था और सभी सरकारी पदों से भी त्यागपत्र दे दिया था। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने राज्य के लगभग हर जिले में भाजपा संगठन को मजबूत करने का काम किया। अब उसी राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है कि उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया है।