"अमृतपाल सिंह की कानूनी चुनौती खारिज, हाई कोर्ट का फैसला"
चंडीगढ़: खडूर साहिब से सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए दूसरे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जिस निरोधात्मक आदेश को चुनौती दी गई थी, उसकी अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है, इसलिए अब इस मामले में किसी प्रकार का कानूनी आधार नहीं बचता।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दूसरे एनएसए की अवधि अप्रैल 2025 से पहले ही खत्म हो चुकी थी। इसके बाद लगाया गया तीसरा एनएसए भी समाप्त हो चुका है। ऐसे में पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका अब केवल अकादमिक बहस बनकर रह गई है और इस पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने माना कि जब संबंधित निरोधात्मक आदेश प्रभावहीन हो चुका हो और परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हों, तब ऐसे मामले में न्यायिक हस्तक्षेप का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह जाता। इसी आधार पर कोर्ट ने लंबित याचिका को निरर्थक मानते हुए खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ पहली बार मार्च 2023 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया था। इसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया था। उस समय पंजाब पुलिस ने राज्यभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए अमृतपाल और उनके समर्थकों पर शिकंजा कसा था।
पहले एनएसए की अवधि पूरी होने के बाद अप्रैल 2024 में पंजाब सरकार ने उन पर दूसरी बार एनएसए लगाया था। इसी दूसरे निरोधात्मक आदेश को अमृतपाल सिंह ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि मामला लंबित रहने के दौरान अप्रैल 2025 में उनके खिलाफ तीसरी बार भी एनएसए लागू कर दिया गया।
तीसरे एनएसए को भी अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन पिछले महीने हाई कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया था। महत्वपूर्ण बात यह रही कि तीसरे एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद पंजाब सरकार ने आगे इसे नहीं बढ़ाया।
अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अमृतपाल सिंह को कानूनी मोर्चे पर लगातार दूसरा झटका लगा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि समाप्त हो चुके एनएसए आदेशों को चुनौती देने का अब कोई विधिक महत्व नहीं रह गया है।