"PAU में अंदरूनी राजनीति, छात्र हित हो रहे नजरअंदाज"
लुधियाना (अशोक सहगल): पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में वर्तमान वाइस चांसलर का कार्यकाल लगभग 4 महीने रह गया बताया जाता है इसी बीच यूनिवर्सिटी कैंपस में वाइस चांसलर की एक्सटेंशन अथवा नए वाइस चांसलर की नियुक्ति को लेकर रस्सा कशी का दौर शुरू हो चुका है इसी बीच कल एक पत्र को लेकर यूनिवर्सिटी में चर्चा का आलम छाया रहा जिसमें वाइस चांसलर की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप को बाहर रखने को कहा गया और नियुक्ति मेरिट के आधार पर करने की मांग उक्त पत्र में की गई।
वर्तमान वाइस चांसलर की नियुक्ति पंजाब के राज्यपाल द्वारा ना करके सीधे सरकार द्वारा की गई थी जिसके विरोध में पंजाब के पूर्व राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पर एतराज जताया था उन्होंने अपने पत्र में इस नियुक्ति को गैरकानूनी मानते हुए कहा था कि इस सिलसिले में वह किसी भी तर्क को नहीं मानेंगे उन्होंने कहा था कि जब तक वॉइस ट्रांसफर की नियुक्ति नियमों अनुसार नहीं की जाती यूनिवर्सिटी का प्रभार कृषि विभाग के एडमिनिस्ट्रेटिव सचिव को सौंप दिया जाए और वाइंस चांसलर की नियुक्ति कानून अनुसार कुलपति के माध्यम से की जाए
परंतु बाद में इस मामले में राजनीति हावी होती दिखाई दी गई इसी बीच राज्य में नये राज्यपाल का आगमन हो गया और मामला कथित तौर पर गैर कानूनी होते हुए भी मान्य हो गया क्योंकि इसमें राजनीति का गहरा हस्तक्षेप था मुख्यमंत्री स्वयं नहीं चाहते थे कि वह किसी और को यहां नियुक्त करें और यह सिलसिला चलता रहा अब चुकी वाइस ट्रांसफर का कार्यकाल लगभग 4 महीने का रह गया है तो यूनिवर्सिटी का माहौल फिर से गर्म होना शुरू हो चुका है।
कोई हक में तो कोई विरोध में: यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों में कोई वाइस चांसलर के हक में तो कोई विरोध में दिखाई देता है कर्मचारियों का कहना है कि जैसे-जैसे समय पास आएगा स्थिति स्पष्ट होती जाएगी परंतु विरोध करने वालों का एक प्रमुख धड़ा पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर की नियुक्ति नियमानुसार करने की बात ही कह रहा है कल व्याप्त रहीची चर्चा में यह भी कहा जाता रहा की यूनिवर्सिटी में बहुत सी अपॉइंटमेंट राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से की गई है। वायरल पत्र में जो बातें उठाई गई उन में प्रमुख रूप से तीन बातें उठाई गई जो आने वाले समय में मुद्दा बन सकती है इनमें
1. सभी असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अपॉइंटमेंट का तुरंत, इंडिपेंडेंट रिव्यू किया जाना ताकि पूरी तरह से हेरफेर का पता चल सके।
2. इवैल्यूएशन सिस्टम, खासकर प्रेजेंटेशन और डिस्क्रिशनरी मार्क्स का पूरा ऑडिट किया जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिज़ल्ट कैसे बदले गए हैं।
3. मेरिट के आधार पर सिलेक्शन तुरंत बहाल किया जाना चाहिए, किसी भी देरी से नुकसान और बढ़ेगा, और ज़िम्मेदारी मौजूदा लीडरशिप की होगी ।