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चंडीगढ़। पंजाब में बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों की जांच को पंजाब पुलिस ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (PBI) द्वारा यह तैयार की गई है। इसके तहत जांच में फॉरेंसिक सटीकता, डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। डिजिटल बेअदबी से जुड़े नियमों या फंडिंग की भी जांच होगी। इन मामलों की SSP व कमिश्नर निगरानी करेंगे। 60 से 90 दिनों में मामले की जांच कर चालान पेश करना जरूरी किया गया है। अब जांच में इन 6 प्वाइंटों पर काम करेगी पुलिस 1. सूचना मिलते ही SHO और जांच अधिकारी (IO) को बिना देरी किए घटना स्थल पर पहुंचना होगा। 2. सबूतों की सुरक्षा के लिए घटना स्थल पर एक आंतरिक घेरा और भीड़ नियंत्रण के लिए बाहरी घेरा बनाना अनिवार्य है। 3. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 'अंगों' (पन्नों) या अन्य धार्मिक प्रतीकों को केवल अधिकृत धार्मिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ही और पूरी मर्यादा के साथ छुआ या स्थानांतरित किया जाएगा। 4. हर घटना स्थल की हाई-रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और मैपिंग की जाएगी। फॉरेंसिक टीमों को तुरंत बुलाया जाएगा। 5. पुलिस केवल पकड़े गए व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे की साजिश और मास्टरमाइंड की भी जांच करेगी। 6. सोशल मीडिया, डीपफेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट की जांच के लिए AI उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसमें बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली फंडिंग की भी जांच शामिल है। मानसिक बीमारी की जांच करेगा मेडिकल बोर्ड अब ऐसे मामलों की जांच के लिए समय सीमा तय की गई है। जांच 60 से 90 दिन में पूरी कर चालान पेश करना जरूरी किया गया है। यदि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर लगता है, तो उसकी मानसिक स्थिति जानने के लिए फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिकों का एक बोर्ड गठित किया जाएगा। इन मामलों की निगरानी सीधे SSP या पुलिस कमिश्नर द्वारा की जाएगी। दोषी पाए जाने पर उम्र कैद की सजा पंजाब सरकार के बेअदबी कानून में दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। जुर्माना 5 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकता है। जबकि इस कानून के तहत दर्ज मामले गैर-जमानती होंगे। इस संबंधी सरकार ने 13 अप्रैल को इस संबंधी प्रस्ताव पेश किया था, जिसके बाद गवर्नर ने इसे मंजूरी दी है।