शहर के औद्योगिक क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 0.75 से बढ़ाकर 2 करने के प्रस्ताव को 11 सदस्यीय समिति ने मंजूरी दे दी है। इससे उद्योगों को अपने प्लॉट पर पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक निर्माण क्षेत्र विकसित करने का अवसर मिलेगा।
यह प्रस्ताव अब अंतिम स्वीकृति के लिए यूटी प्रशासक के पास भेजा गया है। इसके बाद इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि संशोधित नियम जून 2026 तक लागू कर दिए जाएं।
उद्योगों को कैसे होगा फायदा
मौजूदा नियमों के तहत 1,000 वर्ग गज के प्लॉट पर केवल 750 वर्ग गज तक निर्माण की अनुमति है। नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद इसी प्लॉट पर 2,000 वर्ग गज तक निर्माण संभव होगा। इससे उद्योगों को अतिरिक्त मंजिलें बनाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और जगह का बेहतर उपयोग करने का मौका मिलेगा।
प्रशासन के अनुसार एफएआर बढ़ने से औद्योगिक प्लॉटों की व्यावसायिक उपयोगिता भी बढ़ेगी। उद्योगपति अपने अतिरिक्त स्थान को किराये पर देकर आय अर्जित कर सकेंगे, जबकि समान जमीन पर अधिक उत्पादन भी संभव होगा।
लंबे समय से थी मांग
उद्योग प्रतिनिधि लंबे समय से एफएआर बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि पड़ोसी शहर मोहाली और पंचकूला में एफएआर 2 से 3 के बीच होने के कारण चंडीगढ़ का औद्योगिक क्षेत्र प्रतिस्पर्धा में पीछे रह रहा था।
फेज-3 के लिए भी बड़ा प्लान
प्रशासन ने आगामी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में एफएआर को 2.5 से बढ़ाकर 3 करने का प्रस्ताव भी रखा है। साथ ही फेज-1 और फेज-2 में वर्तमान दो मंजिलों की सीमा को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
रोजगार और निवेश को बढ़ावा
चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 3,500 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 24,000 लोग कार्यरत हैं। एफएआर में वृद्धि से न केवल मौजूदा इकाइयों के विस्तार का रास्ता खुलेगा, बल्कि नए निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।