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महिला दिवस विशेष : लिवर डोनर से काउंसलर तक - रूपा अरोड़ा की प्रेरणादायक यात्रा - Uturn Time
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लिवर ट्रांसप्लांट से पहले हर मरीज और परिवार को क्या समझना चाहिए
— एक लिवर डोनर और काउंसलर की नज़र से
रूपा अरोड़ा, अध्यापिका चंडीगढ़ प्रशासन, लिविंग लिवर डोनर एवं सामाजिक कार्य परामर्शदाता (MSW)
भारत में हर वर्ष हजारों लोग लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हैं। उनमें से कई मरीजों के लिए लिवर ट्रांसप्लांट जीवन बचाने का एकमात्र रास्ता होता है। लेकिन मेरे अनुभव में, ट्रांसप्लांट केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक यात्रा भी है। मैं चंडीगढ़ सरकारी स्कूल में एक अध्यापिका हूं। आज से 15 साल पहले मैंने अपने लिवर का 65% अपने पति को डोनेट किया था। मैंने स्वयं एक लिविंग लिवर डोनर के रूप में यह अनुभव किया है, और सोशल वर्क काउंसलिंग की मास्टर डिग्री के बाद, एक सामाजिक कार्य परामर्शदाता के रूप में कई मरीजों और उनके परिवारों से बातचीत करते हुए महसूस किया है कि ट्रांसप्लांट से पहले सही मार्गदर्शन और काउंसलिंग बहुत आवश्यक है। 1. डर और भ्रम को दूर करना ज़रूरी है ट्रांसप्लांट का नाम सुनते ही मरीज और परिवार अक्सर घबरा जाते हैं। कई तरह की आशंकाएँ मन में आती हैं — क्या ऑपरेशन सफल होगा? क्या डोनर सुरक्षित रहेगा? क्या मरीज सामान्य जीवन जी पाएगा? ऐसे समय में सही जानकारी और सकारात्मक परामर्श मरीज और परिवार को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। डॉक्टरों और काउंसलरों का दायित्व है कि वे परिवार को पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाएँ। 2. डोनर का निर्णय – प्रेम और साहस का प्रतीक लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट में कोई व्यक्ति अपने शरीर का एक हिस्सा देकर दूसरे को जीवन देता है। यह केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और साहस का अद्भुत उदाहरण है। डोनर बनने से पहले व्यक्ति और उसके परिवार को पूरी जानकारी और मानसिक तैयारी होना आवश्यक है। सही काउंसलिंग से यह सुनिश्चित होता है कि निर्णय स्वेच्छा और समझदारी से लिया गया हो। 3. परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में परिवार की भूमिका बहुत अहम होती है। मरीज को दवाइयों का नियमित सेवन, समय-समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव की जरूरत होती है। अगर परिवार सहयोगी और सकारात्मक हो, तो मरीज की रिकवरी तेज और बेहतर होती है। 4. ट्रांसप्लांट के बाद जीवन में अनुशासन कई लोग सोचते हैं कि ऑपरेशन के बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। जबकि सच यह है कि ट्रांसप्लांट के बाद अनुशासन और सावधानी पहले से भी अधिक जरूरी होती है। नियमित दवाइयाँ, संतुलित आहार, संक्रमण से बचाव और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श – यह सब नए जीवन की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। 5. समाज में अंगदान की जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता भारत में आज भी बहुत से मरीज केवल इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर अंग नहीं मिल पाता। अगर समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़े, तो असंख्य जीवन बचाए जा सकते हैं। अंगदान वास्तव में महादान है – एक ऐसा दान जो किसी को नया जीवन दे सकता है। निष्कर्ष मेरे व्यक्तिगत अनुभव और काउंसलिंग कार्य ने मुझे यह सिखाया है कि लिवर ट्रांसप्लांट केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि आशा, साहस और मानवता की कहानी है। अगर सही समय पर सही जानकारी, काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग मिल जाए, तो ट्रांसप्लांट के बाद मरीज एक स्वस्थ और सार्थक जीवन जी सकता है। आइए, हम सब मिलकर अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाएँ और इस जीवनदायी संदेश को समाज तक पहुँचाएँ — “अंगदान करें, जीवन बचाएँ।”