छत्तबीर चिड़ियाघर में गम और खुशी का मिला-जुला माहौल
– नवजात दरियाई घोड़े के बच्चे की 30 घंटे में मौत ,– दुर्लभ माउस डियर हिरन के जन्म से स्टाफ में खुशी
मेजर अली
जीरकपुर 29 Dec : छत्तबीर चिड़ियाघर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक साथ दुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। जहां नवजात दरियाई घोड़े (हिप्पोपोटेमस) के बच्चे की जन्म के महज 30 घंटे के भीतर मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर दुर्लभ माउस डियर हिरन के सफल प्रजनन ने चिड़ियाघर प्रबंधन और कर्मचारियों को खुशी दी है।
चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, मादा दरियाई घोड़े ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया था, जिससे स्टाफ में उत्साह का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। नवजात बच्चा जन्म से ही बेहद कमजोर था। आमतौर पर दरियाई घोड़े के बच्चे जन्म के तुरंत बाद हलचल और आवाजें करने लगते हैं, लेकिन इस बच्चे में ऐसी कोई गतिविधि देखने को नहीं मिली।
मादा दरियाई घोड़े ने बार-बार बच्चे को दूध पिलाने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक कमजोरी के कारण वह दूध नहीं पी सका। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की एक टीम ने लगातार 30 घंटे तक बच्चे की निगरानी की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से चिड़ियाघर प्रबंधन और देखरेख करने वाले कर्मचारी काफी मायूस हैं।
माउस डियर हिरन परिवार में बढ़ोतरी
दरियाई घोड़े के बच्चे की मौत से जहां निराशा का माहौल बना, वहीं माउस डियर हिरन के सफल प्रजनन ने चिड़ियाघर को गर्व का अवसर दिया है। दुनिया के सबसे छोटे हिरनों में गिने जाने वाले माउस डियर हिरन का जन्म उत्तर भारत में संरक्षण प्रयासों के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
नवजात माउस डियर हिरन पूरी तरह स्वस्थ है और फिलहाल अपनी मां के साथ सुरक्षित बाड़े में रखा गया है। माउस डियर हिरन बेहद शर्मीले और संवेदनशील जीव होते हैं। उनका सफल प्रजनन इस बात का प्रमाण है कि छत्तबीर चिड़ियाघर का वातावरण उनके लिए अनुकूल है।
चिड़ियाघर प्रशासन का बयान
छत्तबीर चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर नलिन यादव ने बताया,
“दरियाई घोड़े का बच्चा जन्म से ही गंभीर स्थिति में था। उसे बचाने के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई, लेकिन हम सफल नहीं हो सके। वहीं माउस डियर हिरन का जन्म हमारे संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।”