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कैग की रिपोर्ट में सिटको पर गंभीर सवाल, नीतिगत चूकों से 10 करोड़ से ज्यादा का आर्थिक नुकसान - Uturn Time
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अजीत झा. चंडीगढ़ Dec 28 । चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (सिटको) की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि गलत फैसलों, कमजोर प्रबंधन और समय पर कदम न उठाने के कारण सिटको को 10 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। सूचना के अधिकार के तहत यह रिपोर्ट आरटीआई कार्यकर्ता आर.के. गर्ग द्वारा प्राप्त की गई है। कैग निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, निगम के कई अहम प्रोजेक्ट्स और व्यावसायिक इकाइयां घाटे का कारण बनी हुई हैं, जबकि समय रहते सुधार किए जाते तो इन नुकसानों से बचा जा सकता था। ऑनलाइन बुकिंग ठप, थर्ड पार्टी को करोड़ों का कमीशन ऑडिट में खुलासा हुआ है कि सिटको के होटलों—माउंटव्यू, पार्कव्यू और शिवालिकव्यू—की अपनी ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली लंबे समय तक बंद रही। इसका नतीजा यह हुआ कि निगम को पिछले तीन वर्षों में 2.08 करोड़ रुपये मेकमायट्रिप, गोइबिबो और बुकिंग डॉट कॉम जैसे निजी प्लेटफॉर्म्स को कमीशन के रूप में चुकाने पड़े। स्टील डिपो में बिक्री शून्य, खर्च जारी औद्योगिक विकास विंग के तहत संचालित स्टील डिपो की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। वर्ष 2024-25 में यहां एक भी बिक्री नहीं हुई, जबकि पिछले वर्ष मात्र 4.43 लाख रुपये का मार्जिन रहा। इसके बावजूद 10 कर्मचारियों की तैनाती जारी रही, जिससे वेतन और अन्य खर्चों के रूप में 1.42 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सुखना लेक कैफेटेरिया का गलत फैसला सुखना लेक स्थित कैफेटेरिया की दुकान नंबर-6 को किराये पर देने के बजाय खुद बेकरी चलाने का निर्णय भी घाटे का सौदा साबित हुआ। जहां निजी कंपनी इसे लेने को तैयार थी, वहीं निगम को संचालन, किराया नुकसान और इंटीरियर खर्च मिलाकर 37.87 लाख रुपये का झटका लगा। दिल्ली गेस्ट हाउस बना वित्तीय बोझ कैग रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्थित यूटी गेस्ट हाउस का संचालन सिटको बिना किसी औपचारिक समझौते के करता रहा। 2011-12 से 2023-24 तक इस पर 4.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसकी कोई भरपाई नहीं हुई। ब्याज नुकसान जोड़ने पर कुल वित्तीय प्रभाव 5.78 करोड़ रुपये आंका गया है। खाली दुकानों से भी नुकसान होटलों, पेट्रोल पंपों और सुखना लेक फूड कोर्ट की कई दुकानें लंबे समय से खाली पड़ी हैं। समय पर लीज प्रक्रिया शुरू न करने के कारण सिटको को 53.56 लाख रुपये के संभावित राजस्व से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा, औद्योगिक विकास केंद्र के लिए मिली ग्रांट-इन-एड राशि के लिए अलग बैंक खाता न खोलना भी वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया गया है। दशकों पुराने ऑडिट मामले लंबित रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 1994-95 से जुड़े 76 ऑडिट पैराग्राफ अब तक लंबित हैं, जिनमें अनियमित नियुक्तियों और अनावश्यक खर्च जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। कैग ने सिफारिश की है कि सिटको को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, जिनमें ऑनलाइन सिस्टम को पुनः सक्रिय करना, घाटे में चल रही इकाइयों की समीक्षा और खाली संपत्तियों का समयबद्ध व्यावसायिक उपयोग शामिल है। रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि यदि प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में घाटा और बढ़ सकता है।