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अजीत झा. चंडीगढ़ 10 Feb । चंडीगढ़ में पेड पार्किंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में उठा। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने नगर निगम की पार्किंग परियोजना, उसके तकनीकी स्वरूप, क्रियान्वयन में देरी और राजस्व से जुड़े सवाल केंद्र सरकार के समक्ष रखे। इस पर गृह मंत्रालय की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकार का पक्ष रखा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 27 जनवरी 2026 से शहर के सभी पेड पार्किंग स्थलों पर एकल पार्किंग पास प्रणाली लागू कर दी गई है। नगर निगम ने पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक रसीद, रियल टाइम मॉनिटरिंग और केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली को अपनाया है, जिससे शुल्क वसूली और निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है। लोकसभा को यह भी अवगत कराया गया कि जुलाई 2024 से अब तक पेड पार्किंग से 22 करोड़ 43 लाख 90 हजार 681 रुपये की आय हुई है। वहीं, संचालन व्यय घटाने के बाद नगर निगम को 10 करोड़ 21 लाख 71 हजार 97 रुपये की शुद्ध वास्तविक आय प्राप्त हुई है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़े नई व्यवस्था के आर्थिक लाभ को दर्शाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भरोसा भी दिलाया कि पार्किंग परियोजना से जुड़े सभी अनुबंध और क्रियान्वयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से न केवल नगर निगम की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर और सुविधाजनक पार्किंग सेवाएं मिलेंगी। हालांकि, सांसद मनीष तिवारी ने सरकार के जवाब पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि संसद में दी गई जानकारी चौंकाने वाली है। उनके अनुसार, जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक की ओर बढ़ रही है, तब चंडीगढ़ जैसे आधुनिक और नियोजित शहर में आईटी क्षमताओं का इतना कमजोर होना गंभीर चिंता का विषय है। मनीष तिवारी ने कहा कि चार साल पहले प्रस्तावित फास्टैग आधारित कैशलेस पार्किंग प्रणाली आज तक लागू नहीं हो सकी, जिसके कारण नगर निगम को फिर से एकल पार्किंग पास व्यवस्था अपनानी पड़ी। उन्होंने तर्क दिया कि आज भी वाहनों की नंबर प्लेट हाथ से स्कैन कर पुष्टि करना न तो स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप है और न ही आधुनिक तकनीक का सही उपयोग। सांसद ने इसे प्रशासनिक और तकनीकी विफलता करार दिया। इस तरह लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान चंडीगढ़ की पेड पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई, जहां सरकार ने इसे सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बताया, वहीं सांसद ने इसकी तकनीकी सीमाओं पर सवाल खड़े किए।