गमाडा से 300 करोड़ और ग्लाडा से 500 करोड़ रुपये की मांग, जालंधर और बठिंडा प्राधिकरणों को भी देना होगा योगदान; सरकार का दावा- राशि का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में किया जाएगा, वहीं अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत तय शर्तों का पालन नहीं किया गया, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा
चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित दायित्वों को पूरा करने के लिए राज्य के चार प्रमुख विकास प्राधिकरणों से 1,000 करोड़ रुपये की राशि जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह राशि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत जमा कराई जानी है।
सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से 300 करोड़ रुपये, लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी से 500 करोड़ रुपये, जालंधर डेवलपमेंट अथॉरिटी से 100 करोड़ रुपये और बठिंडा डेवलपमेंट अथॉरिटी से 100 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इन विकास प्राधिकरणों ने इसी वर्ष की शुरुआत में राज्य सरकार को करीब 2,500 करोड़ रुपये की राशि पहले ही उपलब्ध करा दी थी। अब मांगी गई नई राशि उन हजारों एकड़ जमीन से जुड़ी है, जिनका अधिग्रहण पिछले वर्षों में विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं के लिए किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, कानून की धारा 10(3) के तहत अधिग्रहित कृषि भूमि के बराबर क्षेत्र का विकास करना या फिर उसके मूल्य के बराबर राशि सरकार के पास जमा कराना अनिवार्य था। आरोप है कि कई मामलों में इन प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
सरकारी सूत्रों का दावा है कि एकत्र की जा रही राशि का उपयोग विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अब तक 94,443 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
वहीं, आवास एवं शहरी विकास विभाग के अधीन आने वाले विकास प्राधिकरणों के पास अब भी बड़ी संख्या में आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां उपलब्ध हैं। अकेले गमाडा के पास ही करीब 24,000 करोड़ रुपये मूल्य की ऐसी संपत्तियां होने का अनुमान है, जिनकी बिक्री अब तक नहीं हो सकी है।