सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए उनकी आर्थिक नीतियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह शांत, विद्वान और सिद्धांतों पर कायम रहने वाले नेता थे। राजनीतिक आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित रखा। सोनिया के मुताबिक उनकी विरासत का आकलन विवादों से नहीं, काम और नीतिगत फैसलों से होना चाहिए।
नई दिल्ली (Naren Danu) : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों और उन्हें बदनाम करने के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं। एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में सोनिया ने कहा कि राजनीतिक विवादों और आरोपों के बावजूद इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को उनके काम और योगदान के लिए सम्मान के साथ याद करेगा।
सोनिया गांधी ने कहा कि डॉ. सिंह की प्रधानमंत्री के रूप में विरासत को केवल उस दौर के राजनीतिक आरोपों की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता। उनकी आर्थिक नीतियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में योगदान का व्यापक प्रभाव रहा है।
‘आरोपों के बीच भी काम का रिकॉर्ड उनके पक्ष में’
सोनिया ने कहा कि डॉ. सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के बावजूद प्रधानमंत्री के रूप में उनका रिकॉर्ड खुद उनकी कार्यशैली और प्राथमिकताओं को सामने रखता है। उनके अनुसार डॉ. सिंह ने आर्थिक बदलाव के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी ऐसे फैसले किए, जिनका असर लंबे समय तक दिखाई देता रहा।
उन्होंने डॉ. सिंह को शांत, विद्वान और सिद्धांतों पर कायम रहने वाला नेता बताते हुए कहा कि राजनीतिक आलोचनाओं के बीच भी उन्होंने सार्वजनिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी।
सीबीआई और कोयला मामले का भी जिक्र
सोनिया गांधी ने लेख में 29 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुए एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कोयला आवंटन से जुड़े मामले में पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से संबंधित टिप्पणियों पर सरकार के रुख का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियां उस दौर की याद दिलाती हैं, जब मनमोहन सिंह सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे थे और उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी तथा छवि पर भी राजनीतिक हमले हुए थे।
सोनिया ने कहा कि उस समय के आरोपों को समझने के लिए तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
‘मनमोहन सिंह की आर्थिक विरासत को व्यापक संदर्भ में देखें’
सोनिया ने कहा कि डॉ. सिंह की आर्थिक नीतियों का आकलन केवल उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद के वर्षों तक सीमित नहीं होना चाहिए। 2004 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला, तब भारतीय अर्थव्यवस्था पहले के आर्थिक सुधारों के बाद तेज गति से आगे बढ़ रही थी।
उनके मुताबिक डॉ. सिंह की आर्थिक सोच और नीतियों ने विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास पर भी जोर दिया।
RTI से मनरेगा तक—सामाजिक क्षेत्र के फैसलों को गिनाया
लेख में सोनिया गांधी ने डॉ. सिंह सरकार की कई प्रमुख योजनाओं और कानूनों को उनकी विरासत का अहम हिस्सा बताया। इनमें सूचना का अधिकार (RTI), मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और शिक्षा का अधिकार (RTE) प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि RTI ने शासन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने का प्रभावी अधिकार दिया। मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी दी, जबकि खाद्य सुरक्षा कानून ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
शिक्षा के अधिकार को कानूनी अधिकार का दर्जा देने और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यकों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
‘लोकतांत्रिक संस्थाओं को मिली पर्याप्त जगह’
सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल को लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार उस दौरान संसद, मीडिया और नागरिक समाज को सरकार से सवाल करने तथा नीतियों पर बहस करने की पर्याप्त गुंजाइश मिली।
उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत का अंतिम मूल्यांकन तत्कालीन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि उनके फैसलों, आर्थिक नीतियों और सामाजिक क्षेत्र में किए गए कामों से होना चाहिए।
सोनिया ने विश्वास जताया कि समय बीतने के साथ पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल और उनके योगदान की तस्वीर और स्पष्ट होगी तथा इतिहास उनके काम का मूल्यांकन अधिक निष्पक्ष दृष्टि से करेगा।