हरियाणा-हिमाचल की सख्त कार्रवाई से तुलना के बीच लुधियाना में उठे सवाल; बाजार में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर मरीजों में संशय, विभागीय निगरानी पर भी चर्चा तेज।
लुधियाना (अशोक सहगल) : ड्रग विभाग की ढीली ढाली कार्रवाइयों के चलते पंजाब नकली तथा निम्न स्तरीय दवाइयां का सुरक्षित केंद्र बन गया है बरसों से ड्रग विभाग ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जिससे नकली दवाइयां के कारोबार करने वालों के दिल में डर बैठ जबकि इसके विपरीत नकली दवाइयां का कारोबार करने वालों हौसले बुलंद बताए जाते हैं उल्लेखनीय है कि पंजाब में नींद में नशे की दवाइयां का इस्तेमाल नशा पूर्ति के लिए किया जाता है और हर नशा करने वाले के पास यह दवाइयां उपलब्ध हो जाती है दवा कारोबारियो का मानना है कि हरियाणा हिमाचल में दवाइयां की जांच को लेकर सरकार काफी सतर्कता भर्ती है और ड्रग विभाग भी काफी चौकन्ना रहता है जिसके चलते नकली दवाइयां का कारोबार करने वाले ऐसी जगह चुनते हैं जहां जांच का भाव और अधिकारी उनके लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखें लिहाजा पंजाब को विशेष कर लुधियाना को कैसे कामों के लिए सुरक्षित स्थल माना जाता है क्योंकि यहां जांच नहीं होती ऐसे काम करने वाले कारोबारी का भारी दबाव ड्रग अधिकारियों पर बना रहता है जिसे लेकर कई तरह की चर्चाएं बाजार में चलती रहती हैं
हरियाणा से सीखने की जरूरत
नकली दवाओं के अंतर्राज्यीय नैटवर्क का भंडाफोड़ 323 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद
हरियाणा फूड एवं ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.डी.ए.) ने दिल्ली के ओखला स्थित एक बिना लाइसैंस वाले थोक विक्रेता के यहां छापेमारी कर अंतर्राज्यीय नकली दवा नैटवर्क का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान टीम ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर 323 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद की हैं।
ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर ने बताया कि जुलाई 2026 में एफ.डी.ए. गुरुग्राम ने नकली टेल्मा-ए. एम. टैबलेट के निर्माण और वितरण में शामिल गिरोह का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि ओखला से नकली दवाओं की सप्लाई गुरुग्राम के मैडीकल स्टोरों तक की जा रही थी।
दरअसल एफ.डी.ए. गुरुग्राम की टीम पिछले कुछ वर्षों से नकली दवाओं के संगठित नैटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2024 में सैक्टर-39 स्थित एक मैडीकल स्टोर एवं आवासीय परिसर पर छापेमारी कर गठिया रोग के उपचार में प्रयुक्त टोफाजैक दवा की 1000 से अधिक नकली डिब्बियां बरामद की गई थीं 4 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यही नहीं वर्ष 2025 में एफ.डी.ए. ने नकली हार्मोन इंजैक्शन 'हैड ऑन' (सोमाट्रोपेन) के अवैध कारोबार का खुलासा किया। इसके बाद अप्रैल 2026 में डी.एल.एफ. फेज-4 और सैक्टर-69 में छापेमारी कर करीब 70 लाख रुपए मूल्य के नकली माउंटजारो इंजैक्शन बरामद किए गए। में हैं।
हिमाचल की 45 दवाओं के सैंपल फेल
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सी.डी.एस.सी.ओ.) द्वारा जारी जून 2026 ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश की दवा निर्माण इकाइयों में निर्मित 45 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। देशभर में इस माह 159 दवा एवं कॉस्मैटिक नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 132 नमूने राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा 27 नमूने केंद्रीय प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान फेल पाए गए। इन 159 नमूनों में हिमाचल प्रदेश में निर्मित 45 दवाओं के नमूने भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा निर्माण इकाइयों के उत्पाद गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाए गए हैं। इनमें एंटीबायोटिक, बच्चों के सिरप, खांसी की दवाएं, दर्द व बुखार की दवाएं, हृदय रोग की दवाएं, पेट संबंधी दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजैक्शन तथा विटामिन उत्पाद शामिल हैं। अधिकांश नमूने डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर तथा सक्रिय औषधीय तत्व (एपीआई) की निर्धारित मात्रा जैसे गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। हिमाचल ड्रग्स विभाग ने सभी संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए हैं परंतु पंजाब में हालत पहले भी जस के तस बने हुए हैं यहां ड्रग विभाग ने एक भी सैंपल ऐसा नहीं पड़ा जो नकली हो परंतु हिमाचल की सभी प्रमुख कंपनियों की दवाइयां बाजार में उपलब्ध रहती हैं और सैंपल भी इस तरह से भरा जाता है कि उसकी रिपोर्ट आने तक बाजार से सारा स्टॉक बिक जाता है। अधिकारियों के इस तालमेल से आम आदमी संशय में है कि वह जो दवा खा रहा है वह असली भी है या नहीं।