ट्राइसिटी के चर्चित रियल एस्टेट ग्रुप माया गार्डन की कई परियोजनाओं को लेकर खरीदार वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। कब्जा, मूलभूत सुविधाओं और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े विवाद रेरा, उपभोक्ता आयोग और हाईकोर्ट तक पहुंचे हैं। कंपनी ने अपने जवाब में कहा है कि कई प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और शेष कार्य जारी है।
जीरकपुर: ट्राइसिटी के सबसे चर्चित रियल एस्टेट डेवलपर्स में शामिल माया गार्डन ग्रुप के कई प्रोजेक्ट भी पिछले कुछ वर्षों से विवादों में रहे हैं। माया गार्डन सिटी, माया गार्डन मैग्नेशिया, माया गार्डन फेज-1, फेज-2 और फेज-3 सहित कई परियोजनाओं में खरीदारों ने कब्जे में देरी, अधूरी सुविधाएं, निर्माण की गुणवत्ता और रिफंड न मिलने जैसे आरोप लगाए। इन मामलों में कई खरीदार उपभोक्ता आयोग, पंजाब रेरा और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचे।
जीरकपुर के तेजी से विकसित हो रहे इलाके में माया गार्डन ग्रुप ने किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किए थे। हजारों लोगों ने अपने घर का सपना पूरा करने के लिए इन परियोजनाओं में निवेश किया। शुरुआती वर्षों में बुकिंग तेज रही, लेकिन समय बीतने के साथ कई परियोजनाओं में निर्माण कार्य की गति धीमी पडऩे लगी। खरीदारों का आरोप है कि तय समय पर कब्जा नहीं मिला और कई टावर लंबे समय तक अधूरे रहे।
अधूरी सुविधाओं को लेकर बढ़ा विवाद
कई रेजिडेंट्स ने आरोप लगाया कि परियोजना में क्लब हाउस, पार्किंग, सीवरेज, सडक़, फायर सेफ्टी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं की गईं। कुछ मामलों में नगर परिषद और फायर विभाग ने भी आवश्यक मानकों को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं। खरीदारों का कहना है कि फ्लैट मिलने के बाद भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।
उपभोक्ता आयोग से मिली राहत
माया गार्डन से जुड़े कई मामलों में खरीदारों ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। हाल के एक मामले में आयोग ने बिल्डर को खरीदार की जमा राशि ब्याज सहित लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि समय पर कब्जा न देना और अनुबंध के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध न कराना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
रेरा और हाईकोर्ट तक पहुंचे विवाद
परियोजना से जुड़े कई विवाद पंजाब रेरा में भी पहुंचे, जहां खरीदारों ने कब्जा, रिफंड और परियोजना की प्रगति को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। कुछ मामलों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल हुईं, जिनमें अधूरी सुविधाओं और प्रशासनिक मंजूरियों से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
खरीदारों का आरोप
रेजिडेंट्स व निवेशकों का कहना है कि वर्षों तक ईएमआई और किराया दोनों का बोझ उठाना पड़ा। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाई, लेकिन समय पर घर नहीं मिला। कई बार खरीदारों ने एकजुट होकर बिल्डर कार्यालय और प्रशासन के समक्ष प्रदर्शन भी किए और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
बिल्डर का पक्ष
माया गार्डन ग्रुप ने विभिन्न मामलों में न्यायिक मंचों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि कई परियोजनाओं में निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष कार्य नियमानुसार आगे बढ़ाया जा रहा है। कंपनी ने कई मामलों में खरीदारों के आरोपों से असहमति भी जताई है।
वर्तमान स्थिति
माया गार्डन की अधिकांश परियोजनाओं में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं, लेकिन कुछ प्रोजेक्टों से जुड़े रिफंड, अधूरी सुविधाओं और निर्माण गुणवत्ता के विवाद अभी भी विभिन्न न्यायिक मंचों पर लंबित हैं। खरीदारों को उम्मीद है कि रेरा, उपभोक्ता आयोग और अदालतों के माध्यम से उन्हें जल्द राहत मिलेगी।