कहा— विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहकर मेहनत करने वाले ही इतिहास रचते हैं; विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं देश के युवा
नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए सोमवार को संस्कृत के एक प्रेरक सुभाषित के माध्यम से साहस, धैर्य और निरंतर प्रयास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत का युवा वर्ग अपने आत्मविश्वास, मेहनत और नवाचार की सोच के बल पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यही ऊर्जा विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी आधारशिला है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक उद्धृत करते हुए बताया कि जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी विचलित हुए बिना पूरी निष्ठा और सजगता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है, अंततः वही सफलता प्राप्त करता है और चुनौतियों पर विजय हासिल करता है।
प्रधानमंत्री ने श्लोक का भावार्थ समझाते हुए कहा कि धैर्य, अनुशासन और सतत परिश्रम ही किसी भी बड़ी उपलब्धि की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका साहसपूर्वक सामना करते हैं, वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल होते हैं।
उन्होंने कहा कि आज भारत के युवा विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम देश को नई दिशा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं का यही संकल्प, सकारात्मक सोच और कर्मठता आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने युवाओं से निरंतर सीखने, चुनौतियों का सामना करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।