चंडीगढ़/यूटर्न/18 जुलाई। राज्यसभा चुनाव में कथित तौर पर क्रॉस-वोटिंग के लिए पार्टी से सस्पेंड किए गए हरियाणा कांग्रेस के पांच विधायकों में से चार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य दौरे के सिलसिले में आयोजित ज़िला-स्तरीय कार्यक्रमों में शामिल हुए। इससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें और तेज़ हो गई हैं। ये विधायक रेणु बाला (सढौरा), जरनैल सिंह (रतिया), शैली चौधरी (नारायणगढ़) और मोहम्मद इसराइल (हथीन क्रमशः यमुनानगर, फतेहाबाद, अंबाला और पलवल में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों में मौजूद थे। सस्पेंड किए गए विधायकों में से केवल पुनहाना के विधायक मोहम्मद इलियास ही दूर रहे; वे नूंह में आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में डाला था वोट
इन पांच विधायकों को कांग्रेस ने तब सस्पेंड किया था, जब उन्होंने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कथित तौर पर बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया था। इस घटना ने हरियाणा में पार्टी की एकता को बड़ा झटका दिया था। प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने इन राजनीतिक अटकलों को और मज़बूत कर दिया है कि वे बीजेपी के करीब जा सकते हैं। हालांकि ये कार्यक्रम सरकार द्वारा आयोजित किए गए थे, न कि एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर बीजेपी द्वारा, फिर भी सस्पेंड किए गए विधायकों की भागीदारी को उनके और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने नहीं दी तवज्जो
हालांकि, कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक ने इस घटनाक्रम को ज़्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने पर कोई कानूनी या राजनीतिक रोक नहीं है। विधायक ने बताया कि दलबदल विरोधी कानून तभी लागू होता जब सस्पेंड किए गए विधायक सरकारी कार्यक्रम के बजाय बीजेपी के पार्टी कार्यक्रम में शामिल होते।
हरियाणा कांग्रेस में अंदरूनी संकट गहराया
इस घटना से हरियाणा में कांग्रेस का अंदरूनी संकट और गहराने की संभावना है, क्योंकि पार्टी राज्यसभा क्रॉस-वोटिंग विवाद के बाद से ही गुटबाज़ी से जूझ रही है। बीजेपी के लिए, प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में सस्पेंड किए गए विधायकों की मौजूदगी को एक प्रतीकात्मक राजनीतिक लाभ के तौर पर देखा जा रहा है, भले ही वह उनके भविष्य के बारे में कोई औपचारिक घोषणा करने से बच रही है।
आने वाले दिनों में हो सकती बड़ी हलचल
सस्पेंड किए गए विधायकों के कांग्रेस से दूरी बनाए रखने और साथ ही बीजेपी के नेतृत्व वाले सरकारी कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के कारण, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ़्ते यह तय करने में अहम साबित हो सकते हैं कि यह घटनाक्रम केवल प्रतीकात्मक बना रहता है या किसी औपचारिक राजनीतिक बदलाव में बदल जाता है।
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