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रिफाइनरी कर्मचारियों के साथ खड़ी हुई सीटू, आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन
पानीपत (निर्मल सिंह विर्क) : रिफाईनरी टाउनशिप के सामने रिफाइनरी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर हैं । सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू ने पानीपत रिफायनरी कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए रिफाइनरी प्रबंधक को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान नहीं किया गया तो सीटू उनके आंदोलन में सड़कों पर उतरकर समर्थन करेगी। *सीटू राज्य सचिव कामरेड सुनील दत्त के नेतृत्व प्रतिनिधिमंडल अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी यूनियन के प्रधान संपूर्ण सिंह, मनोज कटिहार महासचिव, दिनेश उप प्रधान , पवन चहल, चंदन कुमार, ललित कुमार, प्रदीप वत्स धरना स्थल पर मिला। *सीटू राज्य सचिव सुनील दत्त ने कहा कि भारत सरकार के उपक्रम पानीपत में स्थाई कर्मचारी के साथ-साथ ठेका कर्मचारियों का भी शोषण रिफाइनरी प्रबंधक द्वारा किया जा रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि लंबे समय से हम अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को मांग पत्र और बातचीत कर रहे हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारी हमारी मांगों का कोई समाधान नहीं कर रहे हैं इसलिए हम आंदोलन करने पर मजबूर हुए हैं। *पानीपत रिफाइनरी के अंदर लगभग 2500 स्थाई रूप से अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या है जो कार्य करते हैं। जिसमें लगभग 1500 अधिकारी श्रेणी के हैं। जबकि मेंन पावर की रिफाइनरी के विस्तार के चलते बहुत ज्यादा कमी है यूनियन लंबे समय से यह मांग उठा रही है की नई भर्ती की जाए। लेकिन पानीपत रिफाइनरी में 90% कार्य ठेका मजदूरों से लिया जा रहा है। रिफाइनरी से संबंधित लगे सभी प्लांट में और निर्माण के कार्य को जोड़कर वर्तमान समय में लगभग 50000 ठेका मजदूर कार्यरत हैं। जिनका भारी शोषण है। इसी वर्ष 23 फरवरी को बढ़ते शोषण के कारण हजारों की संख्या में स्वत स्फूर्त सड़कों पर उतरे 28 फरवरी तक आंदोलन चला। सीटू के हस्तक्षेप के चलते आंदोलन के दौरान मजदूरों से जिन मांगों को लेकर सहमति बनी थी उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया। लंबे समय से बढ़ती महंगाई के देखते हुए वेतन वृद्धि नहीं की जा रही है इसके खिलाफ कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। वर्तमान समय में रिफाइनरी में कार्यरत परमानेंट कर्मचारी टाउनशिप से संबंधित मूलभूत सुविधाओं को लेकर मांग कर रहे हैं कि पीने तक का साफ पानी नहीं मिल रहा है उनकी मांग है कि प्रदूषित पानी के चलते बीमारी फैलती है इसलिए तुरंत साफ पानी के लिए आरो का प्लांट रिफाइनरी प्रशासन द्वारा लगाया जाए। उन्होंने बताया कि जो कर्मचारी को पहले सुविधा दी जा रही थी उनको भी लगातार कम किया जा रहा है। दवाइयां की गुणवत्ता, टेस्ट के लिए लैब में सुधार आदि मांगे हैं। सीटू किसी भी हाल में परमानेंट कर्मचारियों और ठेका कर्मचारियों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगी उनके आंदोलन का समर्थन करेगी और संघर्ष में शामिल रहेगी।