लुधियाना 18 July । पखोवाल रोड स्थित सेंट्रा ग्रीन्स प्रीमियम अपार्टमेंट्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया, डिजिटल मतदान और पदाधिकारियों की घोषणा पर सवाल उठने के बाद मामला सिविल कोर्ट तक पहुंच गया है। इसी बीच सोसायटी की नई कार्यकारिणी की सूची जारी किए जाने से विवाद और तेज हो गया है।
जारी सूची के अनुसार एस.के. प्रभाकर को अध्यक्ष, योगेश मदान को उपाध्यक्ष, गौरव अग्रवाल को महासचिव, अमित गर्ग को वित्त सचिव और रविंदर धांडा को संयुक्त सचिव निर्विरोध घोषित किया गया है। इसके अलावा सतपाल मक्कड़ को क्लब सचिव, कमिनी शुक्ला को सांस्कृतिक सचिव और सिमरनजोत सिंह सेठी को खेल सचिव बनाया गया है। गौरव कुंद्रा, राम अबोट और वीरेंद्र कुमार वाधवा को कार्यकारिणी सदस्य घोषित किया गया है।
मेंटेनेंस सचिव पद के लिए संजीव गुप्ता और शिवनेटर वर्मा के नाम सामने आए हैं और इस पद पर मुकाबला होने की बात कही गई है। चुनाव से जुड़ी इसी प्रक्रिया को लेकर सोसायटी के कुछ पदाधिकारी और निवासी आमने-सामने आ गए हैं।
उपलब्ध अदालती दस्तावेज के अनुसार **शिवनेटर वर्मा बनाम सेंट्रा ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन** मामले में सिविल कोर्ट, लुधियाना की ओर से संबंधित पक्ष को समन जारी किया गया है। अदालत ने पक्षकार को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपना जवाब और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने और डिजिटल मतदान की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि चुनाव से जुड़े नियमों और प्रक्रिया की पूरी जानकारी सभी निवासियों के साथ स्पष्ट रूप से साझा नहीं की गई। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से फिलहाल इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोसायटी में आयोजित क्रिकेट लीग को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ निवासियों ने लीग के आयोजन, प्रायोजन और खर्चों में लाखों रुपये की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने लीग से संबंधित आय-व्यय, प्रायोजकों से प्राप्त राशि और खर्च किए गए पैसे का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि क्रिकेट लीग में धांधली से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
निवासियों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि चुनाव प्रक्रिया और क्रिकेट लीग के वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सभी के सामने आ सके। उनका कहना है कि बड़ी आवासीय सोसायटी की कार्यकारिणी का चयन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सोसायटी से जुड़ी हर वित्तीय गतिविधि का हिसाब सदस्यों को दिया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद निर्विरोध चुने गए पदाधिकारियों के समर्थकों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। लेकिन मामला अदालत में पहुंचने के कारण अब सोसायटी के निवासियों की नजर कोर्ट की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
फिलहाल डिजिटल चुनाव, पदाधिकारियों की घोषणा और क्रिकेट लीग के खर्चों को लेकर सोसायटी की राजनीति गरमाई हुई है। अदालत के निर्णय और संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।