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भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से बढ़ा जोखिम, 400 करोड़ का जैनीपुर डैम अब भी अधूरा; धुस्सी बांध की मजबूती पर भी उठ रहे सवाल
गुरदासपुर (Naren Danu) : हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के चलते रावी नदी में अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। इससे गुरदासपुर जिले में रावी किनारे बसे सीमावर्ती गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्रेनेज विभाग ने बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त और स्थायी प्रबंध नहीं किए हैं, जिससे हर मानसून में जान-माल का खतरा बढ़ जाता है। रावी नदी रंजीत सागर डैम, शाहपुर कंडी डैम और माधोपुर हेडवर्क्स से होकर पठानकोट व गुरदासपुर में प्रवेश करती है। जैनीपुर के पास इसमें जम्मू-कश्मीर से आने वाली उज्ज और शिंगरावां नदियों के साथ कई स्थानीय नाले भी मिल जाते हैं, जिससे पानी का बहाव अचानक तेज और खतरनाक हो जाता है। मकोड़ा पत्तन जैसे इलाकों में बाढ़ के दौरान नदी का प्रवाह इतना तेज होता है कि नावों का संचालन भी बंद करना पड़ता है। जैनीपुर डैम परियोजना वर्षों से अधर में रावी के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करने और पाकिस्तान की ओर पानी के बहाव को कम करने के उद्देश्य से जैनीपुर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से डैम बनाने की योजना तैयार की गई थी। परियोजना को आवश्यक मंजूरियां भी मिल चुकी हैं, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इस डैम के बनने से बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ दरिया पार बसे गांवों को सड़क संपर्क भी मिलना था। धुस्सी बांध भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रावी किनारे बनाया गया धुस्सी बांध बाढ़ से सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार किसानों और गुज्जर समुदाय द्वारा खेतों तक पहुंचने के लिए बांध पर बनाए गए रास्तों से इसकी मजबूती प्रभावित हुई है। बाढ़ के दौरान इन्हीं स्थानों से बांध टूटने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आसपास के गांवों में पानी घुसने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभागों से जैनीपुर डैम परियोजना को जल्द शुरू करने, धुस्सी बांध को मजबूत करने और मानसून के दौरान बाढ़ सुरक्षा इंतजामों को और प्रभावी बनाने की मांग की है, ताकि हर साल पैदा होने वाले संकट से स्थायी राहत मिल सके।