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ब्रिटेन में भारतीय सामान पर शून्य आयात शुल्क, सोशल सिक्योरिटी योगदान से भी मिलेगी छूट; लग्जरी कारों पर चरणबद्ध तरीके से घटेगी कस्टम ड्यूटी
नई दिल्ली (Naren Danu) : वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत 15 जुलाई से ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (India-UK Free Trade Agreement) लागू करने जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को व्यापक आर्थिक लाभ मिलेगा। समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा, जिससे भारतीय वस्तुएं ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी। सरकार का कहना है कि इससे वस्त्र, इंजीनियरिंग, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण सहित कई क्षेत्रों के निर्यात को नई गति मिलेगी। भारतीय पेशेवरों को बड़ा फायदा एफटीए में शामिल डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) के तहत ब्रिटेन में पांच वर्ष तक कार्यरत भारतीय पेशेवरों को वहां की सोशल सिक्योरिटी स्कीम में योगदान नहीं देना होगा। पहले उनके वेतन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुरक्षा मद में जमा होता था। अब यह राशि भारत स्थित भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा होगी, जिस पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और कर छूट का लाभ मिलेगा। लग्जरी कारों पर चरणबद्ध राहत समझौते के तहत ब्रिटेन में निर्मित चुनिंदा वाहनों पर कस्टम ड्यूटी धीरे-धीरे कम की जाएगी। शुरुआती 15 वर्षों में 3.78 लाख पेट्रोल-डीजल कारों और 1.37 लाख इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड तथा हाइड्रोजन वाहनों के आयात के लिए कोटा तय किया गया है। पहले वर्ष 20,000 पारंपरिक इंजन वाली कारों के आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लागू होगा, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर पांचवें वर्ष तक 10 प्रतिशत किया जाएगा। रियायती शुल्क का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगा, जिनके लिए ब्रिटेन में निर्माण का सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन प्रस्तुत किया जाएगा। तुरंत सस्ती नहीं होंगी कारें विशेषज्ञों के अनुसार कस्टम ड्यूटी में कमी के बावजूद लग्जरी कारों की कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। अंतिम कीमत पर जीएसटी, सेस, लॉजिस्टिक्स लागत, डीलर मार्जिन और विनिमय दर का भी असर रहेगा। हालांकि रोल्स-रॉयस, बेंटले, एस्टन मार्टिन, मैकलेरन और ब्रिटेन में निर्मित कुछ जगुआर लैंड रोवर मॉडल जैसे ब्रांडों को इस समझौते से लाभ मिल सकता है। भारत की रणनीतिक बढ़त पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक व्यापार नीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में भी लंबित व्यापारिक मुद्दों और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होगी। इस बीच एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में सलाह दी है कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में जल्दबाजी से बचते हुए घरेलू उद्योगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके एफटीए से आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।