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आत्ममंथन से आत्मबोध की ओर: महाराष्ट्र में 59वाँ निरंकारी संत समागम - Uturn Time
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चंडीगढ़/ पंचकूला/ सांगली, 24 जनवरी :- आज के समय में जब मानव समाज अनेक प्रकार की संकीर्णताओं, मतभेदों और तंगदिली की सीमाओं में बँटता दिखाई देता है, ऐसे परिवेश में संत निरंकारी मिशन मानवता को जोड़ने, सोच को विस्तार देने और खुद के भीतर झाँककर स्वयं सुधार की प्रेरणा देने का सतत प्रयास कर रहा है। इसी भावभूमि पर आधारित “आत्ममंथन” विषय के साथ महाराष्ट्र का 59वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम आगामी 24 से 26 जनवरी 2026 तक सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है। लगभग 320 एकड़ के विशाल क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस भव्य संत समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, भक्तजन एवं हर वर्ग के नागरिक सहभागी होंगे। जो श्रद्धालु भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो पाएँगे, उनके लिए इस संत समागम का सीधा प्रसारण संत निरंकारी मिशन की अधिकृत वैबसाईट से विश्वभर में किया जाएगा, जिससे यह आध्यात्मिक संदेश वैश्विक स्तर तक पहुँचेगा। इस विराट आयोजन की व्यवस्थाएँ सतगुरु माता जी के आदेशानुसार मिशन के सेवादारों द्वारा 28 दिसंबर 2025 से पूर्णतः सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं निरंतर रूप से संचालित की जा रही हैं। महाराष्ट्र निरंकारी संत समागम के चेयरमैन श्री शम्भुनाथ तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि लंगर, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग, सहायता केंद्र, कैंटीन सहित सभी मूलभूत सुविधाओं के सुचारु संचालन हेतु संत निरंकारी सेवादल के लगभग 30,000 से अधिक सेवादार पूर्ण समर्पण और सेवा-भाव के साथ सेवाएँ प्रदान करेंगे। समागम के तीनों दिन दोपहर 2ः30 बजे से रात्रि 9ः00 बजे तक मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन कार्यक्रमों में विविध क्षेत्रों के भक्तजन अपने प्रेरक विचार प्रस्तुत करेंगे तथा समर्पित संगीतज्ञों द्वारा भक्ति संगीत की ऐसी भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें हर आयु वर्ग एवं विभिन्न भाषा-भाषी श्रद्धालु सहभागी बनेंगे। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी रूहानी कवि दरबार समागम का विशेष आकर्षण रहेगा। प्रत्येक दिन के सत्संग का समापन में सतगुरु के प्रेरणादायी प्रवचनों से होगा, जो आत्ममंथन की भावना को और अधिक सशक्त करेंगे। इस समागम का मुख्य आकर्षण प्रदर्शनी संत निरंकारी मिशन के कलाकारों द्वारा लगाई जा रही है, जिसमें मिशन के इतिहास, दर्शन, आध्यात्मिक संदेशों एवं सामाजिक गतिविधियों का जीवंत एवं प्रेरक चित्रण किया गया है। निरंकारी मिशन के पब्लिकेशन विभाग द्वारा प्रकाशित सभी आध्यात्मिक पुस्तकें एवं पत्रिकाएँ भी श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेंगी। इस विशाल एवं सुव्यवस्थित संत समागम के आयोजन में महाराष्ट्र राज्य की विभिन्न प्रशासनिक एवं सेवा एजेंसियों का भी महत्त्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। मानव मन की सोच और दृष्टि को ज्ञान, विवेक और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यापक बनाने वाले इस संत समागम में संत निरंकारी मिशन सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों का सादर स्वागत करता है। *समागम संबंधित विस्तृत विवरण* *क्षेत्रः-* सांगलवाड़ी, सांगली में आयोजित 59वाँ वार्षिक निरंकारी संत समागम लगभग 320 एकड़ के विशाल क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा, जहाँ प्रत्येक वर्ष की भाँति इस बार भी आध्यात्मिक चेतना का आलोक सर्वत्र व्याप्त होगा। *श्रद्धालु भक्तों की उपस्थितिः-* इस पावन संत समागम में सम्पूर्ण भारतवर्ष से लगभग 3 लाख और दूर-देशों से लगभग 500-1000 श्रद्धालु भक्तजन सम्मिलित होकर आध्यात्मिक वातावरण में आनंद प्राप्त करेंगे। *सेवादलः-* समागम परिसर की सभी तैयारियों से लेकर आयोजन की पूर्णता तक संत निरंकारी सेवादल के लगभग 30 हजार सेवादार अनुशासन और मर्यादा के साथ दिन-रात निस्वार्थ सेवा में समर्पित रहेंगे। यह सेवा-भावना इस वर्ष भी समागम की पहचान बनेगी। *स्वास्थ्यः-* स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से इस वर्ष समागम स्थल पर 4 डिस्पेंसरी स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त 3 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा 1 कायरो चिकित्सा पद्धति शिविर की सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी। अस्वस्थ महात्माओं के उपचार हेतु आवश्यक विशेष चिकित्सीय व्यवस्थाएँ भी सुनिश्चित की गई हैं। *एम्बुलेंस सेवाएंः-* इस वर्ष समागम स्थल पर 15 एम्बुलेंस सेवाओं के लिए तैयार रहेंगी। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन स्थिति में मरीजों को ले जाने के लिए उचित प्रबंध किया गया है। *सुरक्षा प्रबंधनः-* समागम स्थल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से समुचित प्रबंधन किया गया है जिसमें 7 गेट पर 7 चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक स्थान पर अतिरिक्त चेक पोस्ट की व्यवस्था की गई है। मिशन के सेवादल दिन-रात पूरी सतर्कता के साथ ट्रैफिक कंट्रोल में रहेंगे और आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत हर वर्ष की भाँति स्पेशल ड्यूटी की टीम भी सक्रिय रहेगी। महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से बिजली, पानी, स्वच्छता और अग्निशामक शिविर की व्यवस्था की गयी है। अग्निशामक पोस्ट की संख्या लगभग 34 है । साथ ही 5 आग बुझाने की गाड़िया (अग्निशामक) की व्यवस्था की गयी है। इसके अलावा महाराष्ट्र पुलिस, सिविल डिफेंस और स्पेशल ड्यूटी की सेवाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं। *लंगर और कैंटीन प्रबंधनः-* समागम परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु भोजन व्यवस्था को विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है। इसके अंतर्गत तीन सामूहिक भोजन स्थल (लंगर) स्थापित किए गए हैं, जहाँ 24 घंटे सभी के लिए लंगर-प्रसाद उपलब्ध रहेगा। साथ ही विभिन्न मैदानों में चार कैंटीन संचालित की जाएँगी, जिनमें चाय, कॉफी, शीतल पेय एवं अन्य खाद्य सामग्री श्रद्धालुओं को रियायती दरों पर प्रदान की जाएगी। *ज्ञान कक्षः-* समागम स्थल पर 3 ज्ञान कक्ष बनाये गए है, जिसमे अनेको नए भक्त-जन परमात्मा की प्राप्ति करेंगे । *संत समागम प्रवेशद्वारः-* इस समागम में आने के लिए 7 प्रवेशद्वार बनाये गए है। जिनमें 6 सांगली- ईश्वरपुर- सातारा महामार्ग पर स्थित है और 1 प्रवेशद्वार कवठेपिराण की और से बनाया गया हैं। *यातायात व्यवस्थाः-* प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रशासन एवं भारतीय रेलवे के सहयोग से भक्तों के लिए सुचारु यातायात की समुचित व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सांगली व मिरज रेलवे स्टेशनों पर तथा बस अड्डो से समागम ग्राउंड तक निःशुल्क सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। *पार्किंग व्यवस्थाः-* संत निरंकारी मंडल के ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा समागम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु अनेक बसों की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु भक्तों एवं आगंतुकों के लिए सत्संग पंडाल से कुछ दूरी पर सुव्यवस्थित पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। इस उद्देश्य से सातारा-सांगली मुख्य मार्ग के दोनों ओर लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न स्थानों को पार्किंग हेतु चिन्हित किया गया है, जिससे वाहनों की सुचारु आवाजाही बनी रहे और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। *संत निरंकारी मिशन का इतिहासः-* निरंकारी मिशन ब्रह्मज्ञान के प्रकाश से मानव जीवन में आत्मबोध जाग्रत कर, समस्त मानवता को एकत्व और समरसता से जोड़ने का सतत प्रयास करता आ रहा है। वर्ष 1929 से सतगुरु के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाते हुए इंसायित की प्रेरणा दी जा रही है। इसी क्रम में 1948 में दिल्ली से निरंकारी संत समागम की अविरल परंपरा का शुभारंभ हुआ। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में यह संदेश भारत सहित विश्व के अनेक देशों में नई ऊर्जा के साथ प्रसारित हो रहा है। महाराष्ट्र में 1968 से आरंभ हुई संत समागम परंपरा इस वर्ष अपने 59वें गौरवपूर्ण वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, जो जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का सशक्त माध्यम बनी हुई है। *निरंकारी प्रदर्शनीः-* इस वर्ष संत समागम में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण के रूप में ‘आत्ममंथन’ विषय पर आधारित निरंकारी प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जो आत्मचिंतन, आत्मबोध और मानवीय मूल्यों को सजीव रूप में प्रस्तुत करेगी। प्रदर्शनी के प्रथम खंड में निरंकारी मिशन के इतिहास, विचारधारा तथा देश-विदेश में किए गए मानवतावादी सेवा कार्यों की प्रेरक झलक दिखाई जाएगी। द्वितीय खंड में निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की योजनाओं और सेवाओं को दर्शाया जाएगा और साथ ही तृतीय खंड में बाल संतों द्वारा प्रस्तुत मनोहारी बाल प्रदर्शनी ‘आत्ममंथन’ के संदेश को सरल और हृदयस्पर्शी रूप में सभी तक पहुँचाएगी। *पत्रिका विभागः-* इस वर्ष प्रकाशन विभाग द्वारा ६ स्टॉल कार्यक्रम स्थल पर लगाए जाएंगे। यहाँ से सभी श्रद्धालु मिशन के साहित्य, फोटो, डायरी, कैलेंडर और समागम विशेषांक को प्राप्त कर सकेंगे। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पत्रिका विभाग नए सदस्यों के पंजीकरण के लिए अपना कार्यालय कार्यक्रम स्थल पर स्थापित करेगा। समागम के शुभ अवसर पर पत्रिका विभाग द्वारा विशेष स्मारिका ‘आत्ममंथन’ भी प्रकाशित किया जा रहा है। *कचरा निपटान प्रबंधनः-* समागम स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने को विशेष प्राथमिकता देते हुए कचरे के सुव्यवस्थित निपटान हेतु महाराष्ट्र सरकार एवं स्थानीय निकाय द्वारा समुचित प्रबंध किए गए हैं। इसके साथ ही संत निरंकारी मंडल की ओर से भी कचरा संकलन कर उसे नियमित रूप से नगरपालिका के कचरा डिपो तक पहुँचाने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे समागम परिसर स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं पर्यावरण अनुकूल बना रहे।